विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 231
(घ) क्या माननीय सदस्य को यह पता है कि अन्यत्र स्थानों की तुलना में भारत में मिट्टी की धसकन और कोयला-गैस के विस्फोट प्रायः होते हैं क्योंकि पर्याप्त पूर्वोपाय की अभाव है तथा कच्चे कोयले को निकालने के पुराने तरीके अस्तित्व में हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) इस प्रश्न के दोनों भागों का उत्तर सकारात्मक है।
(ख) ग्रेट ब्रिटेन की कोयला-खानों में महिलाओं को भूमिगत स्थलों में काम करने की अनुमति नहीं दी जाती। मुझे उन देशों के बारे में कोई सूचना नहीं है।
(ग) जैसा कि मैंने माननीय सदस्य के प्रश्न संख्या 274, दिनांक 1 मार्च, 1944 के उत्तर में बताया था, खानों में काम करने की दशाएं अत्यंत संतोषजनक नहीं हैं। यह देखने के लिए प्रति संभव उपाय किया जा रहा है कि जीवन की दशा में सुधार किया जाये और पर्याप्त मजदूरी अदा की जाये।
(घ) भारतीय कोयला-खदानों में यंत्रीकरण उतना उन्नत नहीं है जैसा कि इंगलैंड और अमरीका में है।
(घ) भारतीय कोयला-खानों में भूमि के ढह जाने अथवा धसक जाने की घटनाएं उतनी नहीं होती जितनी अन्य देशों में होती हैं जहां कोयला सतह के समीप लगता है। गैस विस्फोट भी भारत की खानों में उतने नहीं होते जितने अधिकांश अन्य देशों की कोयला-खानों में होते हैं। इस देश में सावधानी के पूर्वोपाय किसी भी अन्य देश के पूर्वोपाय की तुलना में हितकर होते हैं।
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* नई दिल्ली स्थित डी.आई.जेड. क्षेत्र के स्क्वेयर
के खुली जगहों को बंद किया जाना
704. सरदार संत सिंहः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि इसके क्या कारण हैं कि नई दिल्ली स्थित डी.आई.जैड. क्षेत्र के अलग-अलग स्क्वेयरों के कोने तथा बीच के खाली स्थानों को बन्द कर दिया गया?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इन मार्गों के बन्द करने का कारण यह था कि लोगों को उपद्रव करने से रोका जाए। यह कार्रवाई लोक स्वास्थ्य विभाग के सुझाव पर की गई।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 3, 1944, 30 मार्च, 1944, पृष्ठ 1746