201 रेल प्रशासन द्वारा अवैध कटौतियों आदि के विरूद्ध मजदूरी संदाय अधिनियम के अधीन आवेदन - Page 249

234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ख) यदि प्रश्न के भाग (क) का उत्तर सकारात्मक है तो ऊपर बताई गई फोर्स से सम्बद्ध दर्जियों के मामले में समान भत्ता क्यों नहीं दिया जाता_ और

(ग) क्या सरकार यह प्रस्ताव करती है कि इस संबंध में दर्जियों की शिकायतों को दूर किया जाए?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) नाइयों, धोबियों और सफाई करने वालों को भर्ती करने की कठिनाई के कारण प्रांतीय सरकारों को विशेष व्यापार भत्ता विशेष वर्गों के भत्ते के बराबर अधिकतम 5 रुपये प्रतिमास भत्ता दिए जाने की अनुमति है। प्रांतीय सरकारों के लिए यह खुला प्रस्ताव है कि ऊपर बताए गए वर्गों के अलावा दर्जियों को मिलाकर उच्च वर्गों के लिए व्यापार भत्ता देने की सिफारिश करें।

(ख) संयुक्त प्रांत की सरकार द्वारा दर्जियों को विशेष भत्ता दिए जाने की कोई सिफारिश नहीं की गई है।

(ग) भारत सरकार कोई कार्यवाही आवश्यक नहीं समझती।

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* रेल प्रशासन द्वारा अवैध कटौतियों आदि के विरूद्ध मजदूरी

संदाय अधिनियम के अधीन आवेदन

222. श्री मोहम्मद अज़हर अलीः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि रेल प्रशासन द्वारा अवैध कटौतियों और देर से भुगतान करने के विरूद्ध पृथक-पृथक निदेशों के लिए 1 अप्रैल, 1938 से मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 15(2) में निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा प्राधिकरण के सामने हर वर्ष कितने आवेदन पेश किए जाते हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 15(2) के अधीन रेल कर्मचारियों द्वारा पेश किए गए आवेदनों की संख्या के बारे में सरकार के पास कोई जानकारी नहीं है। आवश्यक जानकारी हासिल करने में जो श्रम लगेगा वह प्राप्त परिणाम से न्यायोचित नहीं होगा।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1944 का खण्ड 3, 30 मार्च, 1944, पृष्ठ 1757.