211 दिल्ली न्यायालयों में बेदखली के मामले - Page 258

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 243

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* दिल्ली न्यायालयों में बेदखली के मामले

@ 782. खान बहादुर शेख फ़ज्ल-इ-हक पिराचाः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि पंजाब किराया नियंत्रण अधिनियम का विस्तार दिल्ली प्रांत पर करने से दिल्ली में बेदखली के कितने मामले फाइल किए गए हैं_ कितने मामले निपटाए जा चुके हैं और कितने अभी तक न्यायालयों में लम्बित हैं_

(ख) क्या उन्हें मालूम है कि पंजाब किराया नियंत्रण अधिनियम को दिल्ली नगर पालिका क्षेत्र में लागू किए जाने के ठीक बाद मकान-मालिकों ने मकान और फलैट अपने स्वयं में रहने के लिए खाली कराने के लिए बहुत से किरायेदारों से कहा_ क्या सरकार को मालूम है कि ऐसे अधिकांश मामले झूठे हैं और मकान नजराना अदा किए जाने पर उसी या दूसरी पार्टी को किराए पर दे दिए जाते हैं_

(ग) क्या वह पूरे दिल्ली प्रांत में नियंत्रण आदेश बनाने के लिए हिदायतें देने की कृपा करेंगे जिनमें यह प्रावधान किया जाए कि जब तक किराएदार नियंत्रित किराया देता है या देने का इच्छुक है तब तक कोई भी मकान या फलैट खाली न किया जाए_

(घ) क्या उन्हें मालूम है कि नियंत्रण आदेशों के प्रवर्तन के समय से दिल्ली में मकान मालिक अपनी सम्पत्ति में मरमत करने से सामान्यतया इंकार कर देते हैं_ और यदि हां तो क्या वह यह बताने की कृपा करेंगे कि अपनी संपत्ति की देखभाल करने से इंकार करने के लिए मकान मालिकों को दण्डित करने के लिए उनका क्या-क्या उपाय करने का विचार है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) तारीख 28 मार्च, 1944 तक दाखिल किए गए मुकद्मों की संख्या 1444 थी। उनमें से 888 मामले निपटाए जा चुके हैं और 556 लम्बित हैं।

(ख) हां, मैं समझता हूं कि स्थानीय प्राधिकरणों की शिकायतें मिली हैं।

(ग) कुछ उपाय सरकार के विचाराधीन हैं।

(घ) स्थानीय प्राधिकरणों को कुछ शिकायतें मिली हैं और यह विषय विचाराधीन है।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1944 का खण्ड 3, 4 अप्रैल, 1944, पृष्ठ 1919-20 @ प्रश्नकर्ता के अनुपस्थित होने के कारण प्रश्न का उत्तर पटल पर रखा गया।