215 भारतीय मजदूर परिसंघ को सरकारी अंशदान - Page 260

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 245

के लिए, मजदूरी संदाय अधिनियम के अधीन निदेश के लिए रेल कर्मचारियों से मिले आवेदनों की संख्या कितनी है, तथा उन आवेदनों को निपटाने के परिणाम भी बताएं। यदि नहीं निपटाए गए, तो क्यों नहीं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः माननीय सदस्य का ध्यान 30 मार्च, 1944 को पूछे गए श्री मोहम्मद अज़हर अली के अतारांकित प्रश्न सं. 222 के उत्तर की ओर आकृष्ट किया जाता है।

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* भारतीय मजदूर परिसंघ को सरकारी अंशदान

31. श्री लालचन्द नवलरायः (क) 4 अप्रैल, 1944 को दिए गए मेरे तारांकित प्रश्न सं. 776 के उत्तर के संदर्भ में, क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या भारतीय परिसंघ को हर मास दी गई 13000/- रु. की धनराशि परिसंघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों में बांटी गई है। यदि हां, तो कितनी-कितनी_

(ख) क्या माननीय सदस्य ने परिसंघ के संपपरीक्षित लेखाओं को यह पता लगाने के लिए देखा है कि इस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया है_ यदि नहीं तो क्यों नहीं_ यदि हां तो क्या उनका इस तारीख से जिसको यह 13000/- रु. की मासिक सहायता दी गई थी आज तक के संपरीक्षित लेखाओं को सदन के पटल पर रखने का विचार है_

(ग) क्या यह सच है कि यह मुद्दा अन्तर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के समक्ष उठा था जो भारतीय मजदूर परिसंघ और अखिल भारतीय व्यवसाय संघ कांग्रेस के तुलनात्मक प्रतिनिधिक स्वरूप में फिलाडेल्फिया में हुआ था_ और उस सम्मेलन का फैसला क्या था_ अन्तर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन पर भारतीय मजदूर परिसंघ के भावी प्रतिनिधित्व के बारे में क्या विनिश्चय किया गया है_ यह प्रतिनिधित्व एक ऐसे संगठन को दिया जाएगा जो सब्सिडी पर आश्रित नहीं है_

(घ) क्या भारतीय मजदूर परिसंघ को दी गई सब निधियों उसी प्रयोजन पर खर्च की गई हैं जिनके लिए वे दी गई थीं_ यदि हां, तो क्या वह इस बाबत परिसंघ के क्रियाकलाप का संक्षिप्त विवरण देंगे_ यदि उसका कोई हिस्सा उस प्रयोजन के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है जिसके लिए वह दिया गया था, तो क्या माननीय सदस्य

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1944 का खण्ड 4, 2 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 111-13