215 भारतीय मजदूर परिसंघ को सरकारी अंशदान - Page 261

246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

उतने अंश को सरकार को वापस कराने के लिए कदम उठाने की कृपा करेंगे_ यदि नहीं, तो क्यों नहीं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) अनुदान भारतीय मजदूर परिसंघ को एक संगठन के नाते दिया जाता है, न कि उसके पदाधिकारियों में बांटा जाता है।

(ख), और (घ) (प्रथम भाग) सरकार का संबंध परिसंघ के लेखाओं से नहीं बल्कि उस रीति से है जिससे परिसंघ ने सरकारी अंशदान को खर्च किया है। उसका समाधान हो गया है कि हालांकि अनुदान के पहले की अवधि के पूरे और नियमित लेखा उपलब्ध नहीं है, फिर भी इस खर्च से उन उद्देश्यों की प्राप्ति हो गई है जिनके लिए इसे मंजूर किया गया था। तारीख 1 जून, 1944 से परिसंघ के कार्यालय में एक लेखापाल, लेखा तैयार करेगा, और उनकी लेखा-परीक्षा सामान्य तरीके से की जाएगी।

(ग) अन्तर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालयों में अखिल भारतीय व्यवसाय संघ कांग्रेस द्वारा भारतीय शिष्ट-मंडल में कामगारों के प्रतिनिधियों के प्रत्यय पत्रों के बारे में की गई आपत्ति में अनुदान का उल्लेख किया गया था। प्रत्ययपत्र समिति ने अपनी रिपोर्ट में जो सम्मेलन द्वारा अंगीकार कर ली गई थी, सम्मेलन से कहा था कि भारतीय कामगारों के प्रतिनिधियों और उनके सलाहकारों को सम्मेलन के सत्र में सम्भवतः प्रत्यायित (एक्रीडिटेड) माना जाए। समिति की रिपोर्ट में अनुदान का जिक्र नहीं था किन्तु उसमें यह कहा गया थाµ

‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत सरकार सम्मेलन के भावी सत्रों में उचित

रीति से दोनों संगठनों के प्रतिनिधित्व के लिए प्रावधान करने का अपना प्रयास

जारी रखेगी और उसे पूरी आशा है कि दोनों संगठनों में सहमति हो जाएगी जिससे

भारतीय व्यवसाय संघ आन्दोलन के सभी सत्रों के प्रतिनिधियों के अन्तर्राष्ट्रीय

श्रम संगठन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो जाएगी। समिति समझती है कि

यदि ऐसा समझौता नहीं होता है तो सम्मेलन के अगले सत्र में भारतीय कामगारों

का प्रतिनिधि अखिल भारतीय व्यवसाय संघ कांग्रेस की सहमति से नियुक्त किया

जाएगा।’’

(घ) (दूसरा भाग) मासिक अनुदान मुद्रित साहित्य के प्रकाशनों - मौखिक प्रचार, दृश्य प्रचार और आश्वासनप्रद समाचारों के प्रचार करने पर खर्च किया जाता है।

श्री टी.एस. अविनाशलिंगम चेट्टियारः क्या मैं वह उद्देश्य जान सकता हूं जिसके लिए अनुदान दिया गया है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसका उत्तर भाग (घ) (दूसरा भाग) के मेरे उत्तर में मिल जाएगा। उसमें लिखा है कि अनुदान मुद्रित साहित्य के प्रकाशनों,