250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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* भारतीय मजदूर परिसंघ को सरकारी अंशदान
32. श्री लालचन्द नवलरायः (क) 4 अप्रैल, 1944 को दिए गए मेरे तारांकित प्रश्न सं. 776 के उत्तर के संदर्भ में, क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि उनका ध्यान परिसंघ के पहले वार्षिक अधिवेशन में पिछले दिसम्बर में बम्बई में भारतीय मजदूर परिसंघ के अध्यक्ष के इस बयान की ओर आकृष्ट किया गया है अथवा नहीं कि यह घोर काला झूठ है कि उन्हें सरकार से हर मास 13000/- रुपए मिल रहे हैं_
(ख) क्या माननीय सदस्य का ध्यान अन्तर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भाग लेने के लिए फिलाडेल्फिया के लिए प्रस्थान करते समय भारतीय मजदूर परिसंघ के अध्यक्ष श्री जमनादास मेहता के उस बयान की ओर आकृष्ट किया गया है अथवा नहीं जिसमें सरकार की 13000/- रुपए की सहायता राशि के तथ्य से इंकार किया गया था_
(ग) क्या यह भी सच है कि यह बयान 4 अप्रैल, 1944 को सदन में माननीय श्रम सदस्य के बयान के जवाब में दिया गया था, जिसमें इस बात की पुष्टि की गई थी कि भारतीय मजदूर परिसंघ को 13000/- रुपये की राशि दी जा रही है_
(घ) क्या यह सच है कि 13000/- रुपए की सहायता राशि श्री एम.एन. राय को गुप्त रूप से दी जाती है? यदि हां तो राशि इस व्यक्ति विशेष को क्यों दी जाती है भारतीय मजदूर परिसंघ को नहीं_ और
(घ) क्या माननीय सदस्य उन उपायों के बारे में एक संक्षिप्त बयान देने की कृपा करेंगे जो भारतीय मजदूर परिसंघ ने उस अवधि में किए हों जिसके दौरान उसे श्रमिक का मनोबल बनाए रखने में सरकार की सहायता करने का उद्देश्य पूरा करने के लिए मासिक सहायता राशि मिल रही थी?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क), (ख) और (ग) सरकार ध्यान उल्लिखित बयानों की ओर खींचा गया है। शुरू से ही समझौता भारतीय मजदूर परिसंघ के साथ किया गया है, न कि किसी व्यक्ति के साथ। परिसंघ का ध्यान श्री मेहता के बयानों की ओर आकृष्ट किया गया था। परिसंघ ने उत्तर में इस तथ्य की पुष्टि कर दी है कि समझौता परिसंघ के साथ किया गया है।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1944 का खण्ड चार, 2 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 111