252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
‘‘आपने बहुत से अस्थाई भवनों को युद्ध के बाद गिराए जाने के बारे में अपनी
चिन्ता प्रकट की है, जिनके बारे में यह मानना होगा कि वह शहर की सुन्दरता
को नष्ट करते हैं। जैसा कि मैंने विधानमण्डल के सदनों के अपने हाल के
भाषण में घोषणा की थी, जितनी जल्दी हो सके, उन भवनों को हटाया जाना
भारत सरकार की निश्चित नीति है। आशा यह है कि सभी अस्थाई भवन जो
सचिवालय के आस-पास, इरविन स्टेडियम में, विलिंग्डन हवाई अड्डा आदि
के पास, कनाट सर्कस के आस-पास और विभिन्न ब्लॉकों में कार्यालयों और
होस्टलों आदि के रूप में इस्तेमाल के लिए बनाए गए हैं, जो नई दिल्ली विकास
परियोजना के अंतर्गत दूसरी परियोजना के लिए आवंटित किए गए थे, युद्ध स्थिति
बन्द हो जाने के बाद यथा-शीघ्र हटा दिए जाएंगे।’’
(ii) महामहिम लॉर्ड वावेल ने 30 अक्तूबर, 1943 को नई दिल्ली नगरपालिका
द्वारा प्रस्तुत स्वागत भाषण के उत्तर में निम्नलिखित वक्तव्य दिया थाः
‘‘मैं आपको आश्वसन दे सकता हूं कि महामहिम साम्राज्ञी और मैं युद्ध के बाद
अस्थाई भवनों को हटाए जाने के विषय में आपके साथ हूँ। आपको ध्यान होगा कि
लॉर्ड लिंलिथगो ने भारत सरकार की ओर से आपको आश्वासन दिया था।’’
(ख) लॉर्ड लिंलिथगो द्वारा घोषित भारत सरकार के आशय अक्तूबर 1943 से निर्माण कार्यक्रम चलाए जाने की दृष्टि से अब किन-किन भवनों पर लागू होते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हां।
(ख) सभी भवनों को जो अस्थाई निर्माण के हैं और जो दिल्ली के भावी विकास के बाधक होंगे। यह 1941 में निर्मित लोधी रोड के आफिसर बंगलों को या हाल ही में निर्मित लिपिक क्वार्टरों में से अधिकांश पर लागू नहीं है। विशेष रूप से इसका संकेत ओब्जरवेटरी के पीछे लोदी रोड के दक्षिण में निर्माणाधीन लिपिक क्वार्टरों के बड़े ब्लॉक की तरफ नहीं है।
सर एफ.ई. जेम्सः श्रीमन् क्या मैं यह जान सकता हूँ कि यह फैसला कौन करेगा कि इस समय निर्मित अस्थाई भवन दिल्ली के विकास में बाधक होंगे अथवा नहीं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः स्पष्ट है कि भारत सरकार करेगी।
सर एफ.ई. जेम्सः क्या मैं यह भी जान सकता हूँ कि वे भवन जिनका उन्होंने अपने जवाब में हवाला दिया है, जो ‘‘अस्थाई’’ भवन पद के अंतर्गत नहीं आते हैं,