4 श्रमिक के वेतन में अवमूल्यन - Page 27

12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ग) यदि (ख) का उत्तर हाँ में है तो क्या माननीय सदस्य का रेलवे के श्रमिकों के वेतन के मामले पर पुनः विचार करने का इरादा है और उनके वेतन में पर्याप्त राशि की वृद्धि करने का प्रस्ताव है_

(घ) क्या युद्ध की अवधि के दौरान, सरकार का रेलवे के श्रमिकों के लिए

खाने तथा कपड़े के स्टोर स्थापित करने का इरादा है जिनसे उनको उनकी वर्तमान आय के अनुरूप ये वस्तुएं प्रदान की जा सकें और यदि इस व्यवस्था को एक स्थायी उपाय के रूप में जारी रखना संतोषजनक है_ और

(घ) क्या माननीय सदस्य, सरकार द्वारा नियंत्रित रेलवे, प्राइवेट रेलवे (अर्थात् कम्पनी के प्रबंध वाली और निजी राज्य रेलवे) में रेलवे श्रमिकों को दिए जाने वाले वेतन तथा भारत में कपड़ा मिलों, जूट मिलों और लोहा तथा स्टील कारखानों के श्रमिकों को दिए जाने वाले वेतन तथा एक सप्ताह में उनके काम के घंटों का एक तुलनात्मक विवरण देंगे?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जीवन निर्वाह व्यय लागत में समस्त भारत में उसी समान दर पर वृद्धि नहीं हुई है। जीवन-निर्वाह व्यय के विश्वसनीय सूचक केवल कुछ बड़े नगरों के लिए ही हैं_ वेतन की दरों में विभिन्न श्रेणी के कर्मचारियों के लिए एक केन्द्र पर भी बड़ा अंतर है, और वेतन की दरों में गति उसी एक स्थान पर उसी तरह असमान रही है और उसी तरह भिन्न-भिन्न स्थानों पर ही है। इन तथ्यों की दृष्टि से, माननीय सदस्य द्वारा प्रस्तुत प्रश्न का उत्तर देना संभव नहीं है। यदि वह एक ऐसे स्थान के जहां पर निर्वाह व्यय का विश्वसनीय सूचक है, विनिर्दिष्ट श्रमिकों की श्रेणी के संबंध में सूचना चाहते तो मैं उसे देने का प्रयत्न करूंगा।

(ख) नहीं है, मुझे यकीन है कि मंहगाई भत्ता से निम्न गे्रडों में बढ़े हुए जीवन-निर्वाह व्यय की पूर्णतया पूर्ति हो जाती है, यद्यपि उच्च ग्रेड वालों में इससे द्वासमान सीमा तक ही पूर्ति होती है।

(ग) प्रश्न नहीं उठता_ परन्तु मैं यह कहूंगा कि हाल में, महंगाई भत्ते में बहुत अधिक वृद्धि की गई थी, यह वृद्धि भारतीय रेलवे कर्मचारियों के अखिल भारतीय महासंघ के साथ बातचीत करके की गई थी, इस समय उसमें आगे और संशोधन करने का कोई औचित्य नहीं है।

(घ) अनेक रेलों के प्रशासन ने जब आवश्यक समझा अनाज की दुकानें खोली हैं और खोली जा रही है। इन दुकानों को दी गई वस्तुओं की बिक्री प्रांतीय सरकारों द्वारा निर्धारित नियंत्रण मूल्य से अधिक पर नहीं की जाती। युद्ध के दौरान, इन दुकानों