219 शाहदरा (दिल्ली सहारनपुर लाईट रेलवे और निर्णायक नियुक्त करने में सरकार का असांविधानिक आचरण - Page 270

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 255

कार ईस्ट इंडिया रेलवे के कर्मचारियों को भी दिए जाएं।

श्री अनंग मोहन दामः जी हां।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य) ः श्रीमन्, मैं इस प्रस्ताव का विरोध करता हूं और मैं यह कहूंगा कि मेरे माननीय मित्र को असली तथ्यों और परिस्थितियों की काफी गलत जानकारी है। यह न्यायनिर्णय नियम 81क के अधीन हुआ था।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः सदन के सामने केवल एक प्रश्न है कि क्या प्रस्ताव सही रूप में है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं तथ्यों को बताता हूं। यह न्यायनिर्णय भारत प्रतिरक्षा नियमों के नियम 81क के अधीन हुआ था और निर्णायक नियुक्त करने की शक्ति पूरी तरह भारत सरकार में निहित है। इसलिए इस विवाद को तय करने के लिए भारत सरकार द्वारा निर्णायक नियुक्त किए जाने में कुछ भी असांविध ानिक नहीं है, विशेषकर तब जबकि विवाद के अंतर्गत एक रेलवे आता है जो दो प्रांतों में रेलें चलाता है। रेल संयुक्त प्रांत और दिल्ली में है तथा कोई भी एक प्रांत सरकार निर्णायक को नियुक्त करने के लिए हकदार नहीं थी। इसलिए मेरा निवेदन है कि सरकार की कार्यवाही में कुछ भी असांविधानिक नहीं हैं।

जहां तक दूसरे भाग का संबंध है, मेरा निवेदन है कि मेरे माननीय मित्र को इस मुद्दे पर काफी गलत जानकारी है क्योंकि निर्णायक के अवार्ड पर दूसरे रेलवे से संबंधित किसी विवाद को छोड़ा नहीं गया था। निश्चय ही सरकार अवार्ड के प्रावधानों को ऐसे किसी रेलवे पर लागू नहीं कर सकती थी जो विवाद की विषय-वस्तु ही नहीं था। विवाद केवल शाहदरा (दिल्ली) सहारनपुर लाईट रेलवे से संबंधित था न कि ईस्ट इण्डियन रेलवे से।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः ईस्ट इंडियन रेलवे के कर्मचारियों की ओर से ऐसी कोई मांग नहीं की गई थी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः निश्चय ही नहीं, श्रीमन्।

अध्यक्ष महोदयः (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः माननीय श्रम सदस्य द्वारा बताए गए तथ्यों से यह पता चलता है कि इस प्रस्ताव के लिए कोई औचित्य नहीं है। इसलिए इसे नामंजूर किया जाता है।