256 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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* दिल्ली में भवनों पर व्यय
** 132. डॉ. सर जियाउद्दीन अहमदः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि दिल्ली में स्थाई और अस्थायी भवनों पर भारत सरकार ने कितना धन खर्च किया है_
(ख) (i) ऋण, (ii) राजस्व से और (iii) भूमि और पट्टे के समझौतों से कितना
धन दिया गया था_ और
(ग) युद्ध के बाद इन भवनों का क्या होगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) 1939 से निर्मित स्थाई और अस्थाई कार्यालयों और मकानों की कुल लागत 6.38 करोड़ रुपए है।
(ख) मांगी गई जानकारी इस समय उपलब्ध नहीं है।
(ग) स्थाई भवनों को युद्ध के बाद रख लिया जाएगा। जहां तक अस्थाई भवनों का संबंध है, सरकार का इरादा है कि उन्हें युद्ध के बाद यथासाध्य जब कभी दिल्ली के विकास के लिए स्थलों की जरूरत हो, गिरा दिया जाए।
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@ अस्थाई भवनों का गिराया जाना
@@ 133. डॉ. सर जियाउद्दीन अहमदः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य ने अपने विभाग को यह सुझाव दिया था कि भवनों का निर्माण इस तरह किया जाए कि उन्हें युद्ध के शीघ्र बाद गिराया जा सके_ उसमें भी अतिरिक्त धन खर्च होगा_
(ख) क्या सरकार अस्थाई भवनों को गिराने की सोच रही है_ उसे गिराने में क्या खर्चा आएगा और इन भवनों को किस ढंग से गिराया जाएगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं। भवनों का प्राथमिक उद्देश्य युद्ध की जरूरतों को पूरा करना है और वे इस तरह और उन स्थलों पर बनाए गए हैं जो ऐसी जरूरतों को पूरा करने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है। अधिकांश मामलों
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1944 का खण्ड 4, 7 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 319 ** प्रश्न का कोटा समाप्त होने के कारण इस प्रश्न का उत्तर सभा पटल पर रखा गया। @ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1944 का खंड 4, 7 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 319-20 @@ प्रश्नकर्ता का कोटा समाप्त होने के कारण इस प्रश्न का उत्तर सभा पटल पर रखा गया।