224 भारतीय मजदूर परिसंघ को सरकारी अंशदान - Page 275

260 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हाँ।

(ख) हाँ, किन्तु पूर्व कथित दशा में वह विद्युत आयुक्त के पद पर पिछले तीन

वर्ष और 9 माह भारत सरकार की सेवा में रहे हैं।

(ग) सरकार ने इस तरह की कुछ प्रेस रिपोर्टें देखी हैं किन्तु वे सही नहीं हैं

क्योंकि उनमें परामर्शदाता इंजीनियरों को नियुक्त करने के सवाल को ध्यान

में नहीं रखा गया है।

(घ) जहां तक मेसर्स मजऱ् एण्ड मलैलन का संबंध है, उत्तर ‘ना’ में है। फिर

भी सरकार यह समझती है कि अमेरिका की इलैक्ट्रिक बॉण्ड एण्ड शेयर

कम्पनी (न कि अमेरिकन बॉण्ड एण्ड शेयर कम्पनी) जो एक धारक

कम्पनी है, टाटा हाईड्रो-इलैक्ट्रिक ऐजेन्सीज तथा यूनाइटिड ईस्टर्न एजेंसीज

में जो करांची ब्रीच, नासिक- देवली और पूना में विद्युत प्रदाय उपक्रमों

के प्रबंध अभिकर्ता हैं, सारवान हित रखती हैं।

(घ) नहीं।

(च) सम्मेलन की कार्रवाई को प्रकाशित करने के लिए कदम उठाए जा रहे

हैं।

श्री के.सी. नियोगीः हम इन सिफारिशों को कब देखने की आशा कर सकते हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार में लगभग एक सप्ताह में।

श्री मनु सूबेदारः प्रश्न के भाग (घ) के प्रसंग में क्या माननीय सदस्य हमें कुछ आंकड़े दे सकते हैं। क्या यह 400 करोड़ रुपए नहीं है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः तथ्य मुझे अभी प्राप्त नहीं हुए हैं।

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भारतीय मजदूर परिसंघ को सरकारी अंशदान

152. प्रो. एन.जी. रंगाः क्या माननीय श्रम सदस्य श्रम विभाग के पत्र संख्या एल-1882 तारीख 3 मार्च, 1942 के संदर्भ में, जिसमें 13 हजार रुपए प्रति माह के

खर्च में श्रमिक मोर्चे के प्रचार-प्रसार के लिए श्री एम.एन. राय की स्कीम अनुमोदित की गई थी, यह बताने की कृपा करेंगे किः

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1944 का खंड 4, 7 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 337-38