266 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हाँ।
(ख) हाँ।
(ग) मध्य प्रांत और बरार के कोयला क्षेत्रों को में अगस्त 1943 में, बंगाल और बिहार के मामले में नवम्बर, 1943 में, उडि़या के मामले में दिसम्बर, 1943 में। इन कोयला क्षेत्रों में पुरुष श्रमिकों की भारी कमी के कारण हैं।
(घ) ज्यों ही कोयले का उत्पादन उस अंक तक पहुंच जाएगा जब तक निषेध पुनः लागू करना संभव हो जाएगा त्यों ही निषेध पुनः लागू कर दिया जायेगा।
(घ) भूमिगत नियोजित स्त्रियों की कुल संख्या के सही आंकड़े नहीं दिए जा सकते। क्योंकि यह अंक दिन-प्रति-दिन भिन्न होता है। फिर भी अनुमान है कि बंगाल, बिहार, मध्य प्रांत और उड़ीसा में सभी कोयला खानों में इस समय भूमिगत नियोजित स्त्रियों की संख्या लगभग 16 हजार है।
(च) भूमिगत नियोजित स्त्रियां उतनी मजदूरी के लिए हकदार हैं जितनी वैसे ही काम के लिए पुरुषों को मिलती है। भूमिगत नियोजित स्त्रियों की मजदूरी निःशुल्क चावल की रियायत को छोड़कर प्रतिदिन 0-12-0 आने से लेकर 0-15-0 आने तक है। दूसरे कामों में स्त्रियों की मजदूरी संबंधी अद्यतन जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
(छ) स्त्रियों को भूमिगत उन गैलरियों में नियोजित किए जाने की अनुमति नहीं है जिनकी ऊंचाई साढ़े पांच फीट से कम है। वे माईन्स मैटरनिटी बैनीफिट्स ऐक्ट 1941 की प्रसुविधाओं के लिए भी हकदार हैं। इस अधिनियम के प्रावधानों और इसके अधीन बनाए गए नियमों को लागू करने के लिए तीन निरीक्षक नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा तीन कल्याण अधिकारी भी नियुक्त किए जा चुके हैं और खानों के लिए एक महिला कल्याण अधिकारी भी नियुक्त की जा रही है।
श्री मनु सूबेदारः क्या माननीय सदस्य ने कोयला खानों में स्त्रियों के बारे में यहां यूनाईटिड किंगडम में रिपोर्ट देखी है जिसमें यह कहा गया है कि किसी भी स्त्री को कमर से ऊपर कपड़े पहन कर काम नहीं करना चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ।
श्री मनु सूबेदारः इस तथ्य की दृष्टि से कि यूनाइटेड किंगडम में या संयुक्त राज्य अमेरिका में और ब्रिटिश राष्ट्र संघ के किसी क्षेत्र में, युद्ध के दबाव के बावजूद, स्त्रियां भूमिगत काम में नियोजित नहीं है, क्या माननीय सदस्य यह बताएंगे कि वह इस अपमानजनक परिपाटी के पक्षकार क्यों रहे हैं?