विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 267
माननीय बी.आर. अम्बेडकरः कोयले की कमी की वजह से।
श्री एन.एम. जोशीः माननीय सदस्य ने कहा कि स्त्री पुरुष के बराबर वेतन के लिए हकदार है और उनहोंने कहा कि औसतन औरत 12 आने कमाती है, मैं आपके आंकड़ों से सहमत नहीं हूं। मेरी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार कोयला क्षेत्रों में स्त्री और पुरुष दोनों को संयुक्त उत्पादन के लिए संयुक्त रूप से भुगतान किया जाता है। भारत सरकार यह कैसे आश्वस्त होगी कि संयुक्त रूप से की गई कमाई का हिस्सा पुरुष स्त्री को दे?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः संयुक्त मजदूरी वितरित करके आंकड़े आसानी से निकाले जा सकते हैं।
श्री एम.एम. जोशीः क्या मैं पुनः माननीय सदस्य से यह पूछ सकता हूँ कि वह यह कैसे निश्चित करेंगे कि स्त्री पुरुष के समान मजदूरी पाए?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने कहा था कि स्त्री उतनी ही मजदूरी के लिए हकदार है जितनी के लिए पुरुष उतने ही काम के लिए हैं।
श्री एन.एम. जोशीः वह यह कैसे आश्वस्त होंगे कि पुरुष स्त्री की मजदूरी का उसका आधा हिस्सा दें और ज्यादा हिस्सा अपने पास न रखें, और स्त्री को कम हिस्सा न दें।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता। लेकिन मैं यह महसूस करता हूँ कि जो स्त्री-पुरुष काम करते हैं, वे पति-पत्नी होते हैं और मुझे आश्चर्य है कि क्या वे अपनी संयुक्त मजदूरी का निश्चित गणितीय बंटवारा करवाने में बहुत अधिक रुचि रखेंगे।
श्री एन.एम. जोशीः इस तथ्य की दृष्टि से कि माननीय सदस्य ने कहा था कि उन्हें मालूम नहीं है, क्या मैं भारत सरकार से उस वक्तव्य को वापिस लेने की मांग कर सकता हूँ, जो उसने किया है कि स्त्री-पुरुष के बराबर मजदूरी के लिए हकदार है। क्या माननीय सदस्य यह घोषणा नहीं कर रहे हैं कि स्त्री-पुरुष के बराबर मजदूरी ले रही हैं। जब तक वह यह पक्का नहीं कर लेते स्त्री-पुरुष के बराबर मजदूरी कैसे पा सकती है। उन्हें ऐसा बयान देने का हक नहीं है। मेरे विचार में ऐसा गुमराह करना है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह माननीय सदस्य की ओर से केवल एक वाक्छल है।
श्रीमती के. राधाबाई सुसब्बारायणः क्या मैं यह पूछ सकती हूँ कि पिछले सत्र के दौरान दिए गए आश्वासन के अनुसार सरकार ने स्थिति की समीक्षा की है