268 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
और अपना समाधान कर लिया है कि खानों में स्त्रियों को नियोजित करने की इस निर्गम प्रथा को जारी रखना उनके लिए नितान्त आवश्यक है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है।
सर कावसजी जहांगीरः क्या मैं माननीय सदस्य से यह जान सकता हूँ कि क्या गर्भवती स्त्री के लिए भूमि के नीचे जाने पर कोई पाबन्दी है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ऐसी कोई पाबंदी लगाना बहुत कठिन है। क्योंकि जैसा कि मेरे माननीय मित्र जानते हैं, अनेक स्त्रियों में गर्भावस्था का पता लगाना अत्यंत कठिन होता है।
सर कावसजी जहांगीरः निश्चय कि माननीय सदस्य यह समझते हैं कि यह ऐसा कठिन मामला नहीं है। दूसरे कामों में भी यह किया जाता है। यहां भी ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता_ और यदि व्यवहार में नहीं तो सिद्धान्त में ही यह पाबंदी क्यों नहीं लगाई जा सकती कि कोई भी गर्भवती स्त्री भूमिगत काम नहीं करेगी?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं अपने माननीय मित्र को यह आश्वस्त करना चाहूँगा कि यह विषय सक्रिय तौर पर विचाराधीन है।
श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः क्या सरकार ने इन महिला कामगारों के शिशुओं और बालकों की देख-रेख के लिए कोई इंतजाम किया है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः एक कोल माइनर्स वेलफेयर फण्ड की स्थापना की गई है और बालकों की देख-रेख करना इस फण्ड के कर्त्तव्यों में से एक होगा।
श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या सरकार ने इन स्त्रियों के शिशुओं और बालकों की देख-रेख के लिए कोई निश्चित इंतजाम किया है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह एक कानूनी संगठन है और इसके अनिवार्य कर्त्तव्यों में से एक है महिला कामगारों के शिशुओं और बालकों की देखभाल करना।
प्रो. एन.जी. रंगाः क्या मैं यह जान सकता हूँ कि क्या सरकार ने खानों में काम करने वाली स्त्रियों की संख्या घटाने और वहां नियोजित किए जाने वाले पुरुषों की संख्या बढ़ाने के लिए कोई कारगर कदम उठाए हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह भी विचाराधीन है।
प्रो. एन.जी. रंगाः क्या कोई कदम उठाए जा रहे हैं?