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विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 269

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उपायों पर विचार किया जा रहा है।

डॉ. जी.वी. देशमुखः कानूनी प्रावधान के अलावा क्या सरकार को ऐसी किसी व्यवस्था की जानकारी है जो इन गर्भवती स्त्रियों और बालकों की भलाई के रक्षोपाय के लिए की जानी चाहिए?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे विश्वास है कि माननीय सदस्य मुझे यह कहने की अनुमति देंगे कि आसूचना उनका एकाधिकार नहीं है।

डॉ. जी.वी. देशमुखः और न ही यह सरकार का एकाधिकार है।

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* कोयला खानों में श्रमिकों की कमी

240. श्री मनु सूबेदारः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह बात सही है कि कोयला खानों में श्रमिकों की कमी इस कारण है कि हवाई अड्डों के निर्माण के लिए सेना के ठेकेदार ऊंची मजदूरी दे रहे हैं_

(ख) युद्ध से पहले कोयला खानों में कितनी मजदूरी थी और युद्ध के पांचों वर्षों में से प्रत्येक के दौरान कितनी मजदूरी रही है_

(ग) क्या यह सही है कि कोयला खानों में उत्पादन कम होने का कारण यह था कि कोयला खान मालिक उचित मजदूरी देने के लिए तैयार नहीं थे जबकि रहन-सहन अधिक खर्चीला हो गया है_ और

(घ) सरकार ने (i) श्रमिकों की कमी और (ii) कोयले की कमी से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) सेना के ठेकेदारों द्वारा ऊंची दरों पर श्रमिकों का नियोजन कोयला खदानों में श्रमिकों की कमी का एक कारण थाः

(क) @ व्यक्तव्य सदन के पटल पर रख दिया गया है।

(ग) यह सही है कि खदान मजदूरों की मजदूरी काफी समय से बढ़ी हुई मंहगाई से निपटने के लिए पूरी तरह समायोजित नहीं की गई है। श्रमिकों की सप्लाई की कमी का यह भी कारण था।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1944 का खंड 4, 10 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 561 @ व्यक्तव्य यहां शामिल नहीं किया गया हैµ सम्पादक