274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(च) क्या यह बात सही है कि सरकार के पास फरवरी, 1947 में जब उनका वर्तमान लाईसेंस समाप्त हो जाएगा दिल्ली इलैक्ट्रिक सप्लाई एण्ड ट्रेक्शन कम्पनी लिमिटेड को खरीदने का विकल्प है बशर्तें कि फरवरी, 1945 में कम्पनी को नोटिस दे दिया गया हो_ यदि हां, तो क्या विकल्प के प्रयोग के सवाल पर अभी तक विचार किया गया है और उसके क्या परिणाम निकले हैं_ और
(छ) सरकार को इस उपक्रम को खरीदने की दशा में क्या रकम देनी होगी और इसे खरीदने पर सरकार किसी सीमा तक इंग्लैंड में भारत के खाते में शेष स्टर्लिंग का इस्तेमाल कर सकती है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हाँ। कम्पनी का लाईसेंस 2 मार्च, 1905 से शुरू होता है। इस समय सप्लाई के क्षेत्र हैंµ (i) दिल्ली नगरपालिका समिति के अधिकार का सम्पूर्ण क्षेत्र, (ii) दिल्ली सिविल स्टेशन अधिसूचना सम्पूर्ण क्षेत्र, (iii) पश्चिमी दिल्ली अधिसूचित सम्पूर्ण क्षेत्र, और (iv) दिल्ली जिला बोर्ड के अधि कार की भूमि का एक हिस्सा।
(ख) युद्ध काल में जानकारी देना लोक-हित में नहीं है।
(ग) हाँ। इस समय कम्पनी का विद्युत जनन संयंत्र कमोबेश रूप में एक स्टेंड बाई (अतिरिक्त) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
(घ) हाँ।
(घ) विवरण पटल पर रखा है।
(च) हाँ। अब यह प्रश्न दिल्ली के मुख्य आयुक्त के विचाराधीन है।
(छ) भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 की धारा 7 की उपधारा (i) के प्रथम परन्तुक के अनुसार लाइसेंस की समाप्ति के लिए दी जाने वाली कीमत, यदि खरीदने के विकल्प का प्रयोग किया जाता है, मध्यस्थम द्वारा निर्धारित खरीद के समय उचित बाजार मूल्य होगी। जब तक यह मालूम न हो जाए कि इसमें कितनी रकम लगेगी तब तक सवाल के उत्तरार्द्ध का उत्तर देना संभव नहीं है।
विवरण
दिल्ली इलैक्ट्रिक सप्लाई एण्ड ट्रेक्शन कम्पनी लिमिटेड से दिल्ली सैन्ट्रल इलैक्ट्रिक पावर अथॉरिटी लिमिटेड द्वारा थोक में प्रदत्त विद्युत पर 69 आने प्रति यूनिट लिया जाता है।
दिल्ली इलैक्ट्रिक सप्लाई एण्ड ट्रेक्शन कम्पनी लिमिटेड द्वारा ली जाने वाली दरेंµ