234 कोयला खानों में स्ति्रयों की हालत का अध्ययन करने के लिए अखिल भारतीय महिला सम्मेलन को सुविधाएं देने से इंकार - Page 293

278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ख) सवाल के पहले भाग का जवाब हां में है। इसके कारण सम्मेलन के अध्यक्ष को सम्बोधित भारत सरकार के पत्रों में बता दिये गये थे।

श्री के.सी. नियोगीः क्या मैं वे कारण जान सकता हूँ कि जिनकी वजह से सरकार को भाग (ख) में उल्लिखित आदेश पारित करना पड़ा था?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः समय उपयुक्त नहीं था।

श्री एन.एम. जोशीः ‘समय उपयुक्त नहीं था’ से सरकार का क्या अभिप्राय है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार में ‘‘उपयुक्त’’ शब्द बहुत साधारण शब्द है। इसे हर कोई समझ सकता है। मैं नहीं समझता कि मैं इसे और सरल कर सकता हूँ।

श्रीमती रेणुका रेः क्या यह सच है कि सरकार ने उसी अवधि में वहां जाकर अन्वेषण करने के लिए रैगी और स्वास्थ्य सर्वेक्षण समितियों को इजाजत दे दी थी? क्या यह सच है कि अखिल भारतीय महिला संगठन को अभी तक इजाजत नहीं की गई है? यदि हां, तो इस भेदभाव का आधार क्या है_ और ऐसा क्यों है कि अखिल भारतीय महिला संगठन जैसे जिम्मेदार निकाय को, जो स्त्रियों की भलाई में रुचि रखते हैं, इजाजत नहीं दे गई है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जिन्हें अनुमति दी गई थी वे शासकीय निकाय हैं।

श्रीमती रेणुका रेः क्या विधान-मण्डल के सदस्य उस समिति में नहीं हैं?

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः माननीय सदस्य तर्क कर रहे हैं।

श्री टी.एस. अविनाशलिंगम चेट्टियारः स्त्रियों को खानों में जाकर अन्वेषण करने से क्यों रोका जाता है। सरकार ऐसा क्यों समझती है कि केवल स्त्रियों के संगठन के लिए उपयुक्त समय नहीं है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः माननीय सदस्य जो चाहे निष्कर्ष निकाल सकते हैं।

श्री एन.एम. जोशीः क्या मैं यह पूछ सकता हूँ कि क्या यह सच नहीं है कि सरकार हर समय उपयुक्त नहीं समझती क्योंकि खानों में व्यवस्थाएं इतनी खराब हैं कि वह नहीं चाहती कि किसी निष्पक्ष निकाय द्वारा छानबीन की जाए?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः माननीय सदस्य जैसा चाहे वैसे निष्कर्ष निकालें।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः अगला प्रश्न।