235 मलेरिया की वजह से कोयला खानों में श्रमिकों की कमी - Page 294

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 279

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* मलेरिया की वजह से कोयला खानों में श्रमिकों की कमी

580. श्रीमती रेणुका रेः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या यह सच है कि खासकर अगस्त और सितम्बर मास के दौरान कोयला खानों में श्रमिकों की कमी हुई थी, क्योंकि ज्यादातर खान मजदूर मलेरिया में पड़े हुए थे और पर्याप्त कुनैन न दिये जाने के कारण उनका समुचित इलाज संभव नहीं था_ और

(ख) क्या माननीय सदस्य को इस बात की जानकारी है कि खान मजदूर बीमारियों और कुपोषण से इतने बुरी तरह ग्रस्त हैं कि इससे उनकी दक्षता पर गंभीर रूप से प्रभाव पड़ा है_ और यदि हां तो इसके उपचार के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) कोयला खान मजदूरों को भी मलेरिया के मौसम में मलेरिया हो सकता है। लेकिन यह कहना सही नहीं है कि अगस्त और सितम्बर के दौरान ज्यादातर मजदूर मलेरिया से पीडि़त थे। झरिया कोयला क्षेत्र में काम करने वाले औसत दैनिक एक हजार मजदूरों में से 1943 और 1944 में अगस्त के महीने में इस रोग से पीडि़त लोगों की संख्या क्रमशः 81 और 80 थी और 1943 और 44 में सितम्बर महीने में यह संख्या 111 और 74 थी। इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं देने के लिए तथा काफी मात्रा में कुनैन और उसकी जगह दूसरी दवाइयां देने के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है।

(ख) यह नहीं कहा जा सकता कि खान मजदूर भारी मात्रा में कुपोषण के शिकार हैं। जहां तक उनके स्वास्थ्य का संबंध है, 30 या अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाली सभी खदानों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी डिस्पेंसरी चलाएं और अपने डॉक्टर की मार्फत दवाईयां बांटे। कोयला खान मजदूर कल्याण-कोष की हाल ही में स्थापना की गई है जिसमें से खान में काम करने वाले लोगों की बीमारी को रोकने के उपाय और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए धन दिया जाएगा।

श्री के.सी. नियोगीः कुपोषण संबंधी मुद्दे के बारे में, क्या माननीय सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि खानों में श्रमिकों की कमी के साथ-साथ का व्यक्तिगत उत्पादन भी कुपोषण की वजह से कम हो गया है?

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 5, 1944, 20 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 1000-02