237 गर्भवती महिलाओं द्वारा खानों में भूमिगत काम - Page 297

282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ख) सरकार ने गर्भवती स्त्रियों को भूमिगत काम करने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं_

(ग) क्या यह सच है कि पिछले साल के अन्दर ही भूमिगत काम करने वाली स्त्रियां दुर्घटनाग्रस्त हुई हैं और यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि उनमें से कितनी दुर्घटनाएं गर्भवती स्त्रियों के साथ हुई हैं_ और

(घ) क्या यह सच है कि कुछ ही खानों में प्रसूति सुविधाएं दी जाती हैं_ खान के क्षेत्रों में काम करने वाली सभी स्त्रियों के लिए प्रसूति सुविधाएं अनिवार्य बनाने के लिए सरकार क्या-कया कदम उइाना चाहती है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) इस आरोप के आधार की कोई जानकारी नहीं है। खान प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम (माइन्स मैटरनिटी बेनिफिट्स एक्ट) की धारा 3 के अधीन गर्भवती स्त्री के बच्चा जनने के बाद चार सप्ताह की अवधि तक उसको नियोजन वर्जित है। इसके अलावा स्त्री बच्चे को जन्म देने से पहले एक माह की छुट्टी के लिए हकदार है। इस अधिनियम के अधीन निरीक्षण

खान मुख्य निरीक्षक के अधीन श्रम निरीक्षकों द्वारा नियमित रूप से किए जाते हैं। वे सभी डॉक्टर हैं। ये निरीक्षण अधिनियम के प्रावधानों को और उसके अधीन बनाए गए नियमों को लागू करने के लिए किए जाते हैं।

(ख) जैसा कि पहले कहा जा चुका है, गर्भवती स्त्रियां बच्चे के जन्म से लेकर एक माह की छुट्टी के लिए हकदार है तथा खान मुख्य निरीक्षक के अधीन श्रम निरीक्षकों के नियोजन का उद्देश्य इन स्त्रियों को अधिनियम के अधीन उनके अधिकारों की जानकारी देना और उन्हें इस अधिनियम के फायदे दिलाने में उनकी मदद करना है।

(ग) हाँ। लेकिन ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि इनमें से कई स्त्रियां गर्भवती थीं। दुर्घटना के बाद छानबीन के दौरान खदान डॉक्टर का साक्ष्य अनिवार्यतः लेखबद्ध किया जाता है और यदि कोई स्त्री गर्भवती थी तो उसकी हालत प्रकट की जाएगी और लेखबद्ध की जाएगी।

(घ) खान प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम (माइन्स मैटरनिटी बेनिफिट्स एक्ट) 1941 ब्रिटिश भारत में निम्नलिखित के सिवाय सभी खानों को लागू होता हैः

(i) बम्बई प्रान्त में खानों के रूप में कुछ पत्थर तोड़ने वाले संयंत्र।

(ii) लोह अयस्क खानें, जो बिना यांत्रिक शक्ति के काम करती हैं, जिनमें से सारा अयस्क स्थानीय तौर पर ग्रामीण स्मेलटरों और लुहारों को दिया जाता है।