238 कोयला खानों में भूमिगत काम करने वाली स्ति्रयों पर निष्ोध की बहाली - Page 298

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 283

(iii) वे खाने जिनमें भावी प्रयोजनों के लिए ही खुदाई चल रही है, बशर्तें कि ज्यादा से ज्यादा बीस व्यक्ति ऐसी खुदाई में या कि आस-पास नियोजित हैं कुछ अन्य शर्तों के अधीन रहते हुए।

इन छोटी-छोटी खानों में प्रसूति सुविधाओं को अनविर्य बनाना आवश्यक नहीं समझा गया है।

श्री लालचन्द नवलरायः क्या वास्तव में ऐसे कोई मामले हैं जिनमें गर्भवती स्त्रियों को चोट आई हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, कुछ हैं।

श्री लाल चन्द नवलरायः कब?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जब से उन्होंने काम करना शुरू किया। कोयला खानों में ऐसी घटनाएं प्रायः होती रहती हैं।

श्रीमती रेणुका रेः क्या माननीय सदस्य हमें यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या गर्भवती स्त्रियों को उन खानों में जाने से रोकने का सबसे बढि़या तरीका भूमिगत काम करने वाली स्त्रियों पर निषेध बहाल करने का नहीं होगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं पूरी तरह सहमत हूँ, बशर्तें कि परिस्थितियां अनुकूल हों।

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* कोयला खानों में भूमिगत काम करने वाली

स्त्रियों पर निषेध की बहाली

582. श्रीमती रेणुका रेः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) भारत सरकार अपने पहले वायदे की दृष्टि से कोयला खानों में भूमिगत काम करने वाली स्त्रियों पर निषेध को कब बहाल करने का विचार रखती है, और

(ख) स्त्रियों के भूमिगत नियोजन से कोयले के उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) सरकार निषेध को पुनः लागू करने के लिए अत्यन्त आतुर है। ज्यों ही कोयले का उत्पादन उतना हो जाएगा जब ऐसा निषेध पुनः लागू करना संभव हो तो वह लगा दिया जायेगा।

(ख) स्त्रियों के भूमिगत काम के परिणामस्वरूप कोयले के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है लेकिन कोई निश्चित आंकड़े नहीं दिए जा सकते, क्योंकि अन्य कारक भी उसी समय क्रियाशील हैं।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 5, 1944, 20 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 1004