288 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
पूरी तरह से तथ्य पर आधारित होते हैं कि यदि कुछ लोगों को एक या दो साल का विस्तार न दिया जाए तो वे अपनी पेंशन ही गंवा बैठेंगे।
काज़ी मोहम्मद अहमद काज़मीः क्या यही एकमात्र कारण है अथवा क्या कोई दूसरा कारण भी है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेउकरः मुझे दूसरा कोई कारण मालूम नहीं है।
काज़ी मोहम्मद अहमद काज़मीः क्या माननीय सदस्य यह छानबीन करने की कृपा करेंगे कि जिन मामलों में विस्तार दिए गए थे क्या वे एकमात्र इसी कारण से थे या किसी दूसरे कारण से?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने छानबीन की है और मेरे पास यही जानकारी है।
मौलवी मोहम्मद अब्दुल गनीः क्या मैं उन ‘‘कुछ मामलों’’ में सम्मिलित व्यक्तियों के नाम जान सकता हूं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे पास व्यक्तियों के नाम नहीं हैं। लेकिन मेरे सामने कुछ मामले है।
मौलवी मोहम्मद अब्दुल गनीः वे किस सम्प्रदाय के हैं?
(कोई उत्तर नहीं दिया गया)
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) अगला प्रश्न।
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* भारत सरकार मुद्रणालय, नई दिल्ली के जिल्दसाजों और
भाण्डागारपालों के लिए काल वेतनमान
602. काज़ी मोहम्मद अहमद काज़मीः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) क्या यह सच है कि भारत सरकार ने काल वेतनमान मंजूर कर दिया है जिसके लिए भारत सरकार मुद्रणालय, नई दिल्ली के जिल्दसाज और भाण्डागारपाल अभ्यादेवन कर रहे थे_
(ख) क्या यह सच है कि ये लोग लगभग पिछले 15 साल से इस परियोजना के लिए आवेदन कर रहे हैं_
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 5, 1944, 20 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 1013