विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 289
(ग) क्या यह सच है कि कुछ भाण्डारगारपाल, जो पिछले 15 और 20 साल से सेवा कर रहे हैं और जिनका वेतन इस समय केवल 25/- रुपए प्रति माह है, उनको काल वेतनमान से कोई भी लाभ नहीं हुआ है_
(घ) क्या यह सच है कि किसी भी आदमी को तुरन्त एक भी वेतन-वृद्धि मंजूर नहीं की गई है_ और
(घ) यदि (क) से (घ) के उत्तर हाँ में है तो क्या माननीय सदस्य काल वेतनमान शुरू करते समय सभी जिल्दसाजों और भाण्डारगारपालों को कम से कम एक वेतन वृद्धि-मंजूर करने के औचित्य पर विचार करेंगे जिससे कि उन लोगों को कुछ अतिरिक्त राहत मिल सके जो पिछले इतने सालों से इंतजार कर रहे हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हाँ।
(ख) हाँ, पिछले कुछ समय से।
(ग) हाँ, ज्यों ही वे अपनी अगली वेतनवृद्धि अर्जित कर लेंगे उन्हें इसका फायदा मिलेगा।
(घ) हाँ, केवल 22 जून, 1944 से जब काल वेतनमान लागू हुआ था, अभी तक कोई वेतन वृद्धि-अर्जित नहीं की गई है।
(घ) प्रस्तावित रूप में कोई कार्रवाई आवश्यक नहीं है क्योंकि वे आदमी अगले साल अपनी वेतन-वृद्धियां अर्जित करेंगे।
काज़ी मोहम्मद अहमद काज़मीः क्या माननीय सदस्य इस पर विचार करने की कृपा करेंगे कि कुछ व्यक्ति सेवा-निवृत्ति के करीब होंगे और उन्हें इस काल वेतनमान से कोई फायदा नहीं मिलेगा तो क्या सरकार द्वारा उनकी पिछली सेवा के बदले कोई वेतनवृद्धि देना ऐसे मामले में उचित नहीं होगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि ऐसे पेचीदा मामलों से निपटने के लिए कानून में फेरबदल करना बुद्धिमानी होगी।
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* उड़ीसा में महानदी परियोजना का विकास
607. प्रो. एन.जी. रंगाः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) क्या उन्हें मालूम है कि उड़ीसा में बाढ़ प्रकोप रोकने के लिए महानदी पर सर.एम. विश्वेश्वरैया समिति की रिपोर्ट में महानदी परियोजना के विकास और
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 5, 1944, 20 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 1018