290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
कटक सम्बलपुर, पुरी तथा बालसौर जिले में बहुत बड़ी भूमि की सिंचाई के लिए नहरें बनाने का सुझाव दिया गया है_
(ख) क्या ऐसी स्कीम की अनुमानित लागत 1938-39 में लगभग चार करोड़ रुपए थी_ और
(ग) क्या भारत सरकार उड़ीसा प्रान्त की वित्तीय अस्थिरताओं और अधिक चावल उत्पादन की भारत की बड़ी जरूरत को ध्यान में रखते हुए उस स्कीम को शुरू करने और आगे बढ़ाने के औचित्य पर विचार करेंगी?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) और (ख) नहीं। इस विषय से संबंधित जानकारी मांगी जा रही है।
(ग) सरकार स्कीम की ध्यानपूर्वक छानीबन किए बिना इस समय ऐसा आश्वासन नहीं दे सकती।
प्रो. एन.जी. रंगाः क्या सरकार इस स्कीम की ध्यानपूर्वक छानबीन करने के लिए तैयार है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ।
प्रो. एन.जी. रंगाः क्या यह विभिन्न उप-समितियों में से किसी के अथवा नेशनल प्लानिंग स्ट्रक्चर ऑफ कमेटीज़ के अन्वेषण का अंग होगी।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सरकार क्या प्रक्रिया अपनाए, इस बारे में नहीं कह सकता। लेकिन मैं इस विचार करूंगा।
प्रो. एन.जी. रंगाः शुक्रिया।
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* बिहार में खदान मजदूरों को चावल की
सप्लाई के लिए इंतजाम
611. श्री के.सी. नियोगीः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य विस्तारपूर्वक यह बताने की कृपा करेंगे कि खदान मजदूरों को चावल देने के लिए बिहार प्रांत में क्या-क्या इंतजाम किए गए हैं_
(ख) क्या माननीय सदस्य को कोई शिकायत मिली है कि बिहार प्राधिकरीगण
खदानों के मजदूरों को चावल देने के लिए कुछ खदानों से कीमत ले रहे हैं, जो
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 5, 1944, 20 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 1021