विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 291
नियंत्रित कीमत से अधिक है और यह कि उन चावलों की क्वालिटी भी घटिया है_ यदि हां, तो इन शिकायतों में कौन-कौन से भिन्न-भिन्न मुद्दे उठाए गए हैं और उनके बारे में निश्चित किए गए तथ्य कौन-कौन से हैं_
(ग) इस विषय में बिहार में विद्यमान प्रणाली बंगाल खदानों में शुरू की गई प्रणाली से किस प्रकार भिन्न है_ और
(घ) सरकार इस विषय में बिहार खदानों की ओर से की गई शिकायतों को दूर करने के लिए क्या कार्रवाई करने का विचार रखती है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) भारत प्रतिरक्षा नियम के अधीन अपर उपायुक्त, धनबाद द्वारा जारी किए गए तारीख 20 अप्रैल, 1994 के आदेश के अनुसार प्रत्येक खदान कामगार अपने लिए और अपने वयस्क आश्रित के लिए ज्यादा से ज्यादा चार से खाद्यान्न प्रति सप्ताह (उसमें से चावल ज्यादा से ज्यादा दो सेर होगा) और प्रत्येक अवयस्क आश्रित के लिए दो सेर खाद्यान्न प्रति सप्ताह (जिसमें से चावल एक सेर से अधिक नहीं होगा) खाद्यान्न की दुकान से अपर उपायुक्त द्वारा नियंत्रित कीमतों के समान कीमतों पर खरीदने के लिए हकदार है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक भारी भरकम कामगार प्रत्येक हाजिरी के लिए आधा सेर चावल के निःशुल्क राशन के लिए हकदार है। लेकिन यदि खनिज पूरा या आंशिक निःशुल्क राशन दूसरे अनाज में लेना चाहें, तो वे ऐसा कर सकते हैं।
(ख) पहले भाग का उत्तर हां में है। तथ्य ये हैं कि बिहार सरकार ने खदान संघों से एक नवम्बर, 1944 तक सप्लाई किए गए चावल की वास्तविक लागत वसूल की है। ये प्रदाय थोक में नेपाल में उगाए जाते हैं जहां से बिहार सरकार को अपने काबू से बाहर की दर पर खरीदना पड़ता है। परिणामस्वरूप नेपाल की चावल सप्लाई स्थानीय थोक नियंत्रित दर से ऊपर लगभग एक रुपए आठ आने की दर से
खदान संघों को दी गई है। एक नवम्बर, 1994 से बिहार सरकार ने स्थानीय थोक नियंत्रित कीमत तथा चार आने प्रशासनिक खर्च वसूल करने और बाकी नुकसान खुद वहन करने का फैसला किया है। क्वालिटी के विषय में शिकायत के तथ्यों के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है।
(ग) बंगाल के खदानों में कोई राशन प्रणाली नहीं है, लेकिन एक हजार कामगारों से अधिक के नियोजक सरकार के नागरिक आपूर्ति विभाग से अनाज खरीदते हैं। बिहार में प्रत्येक खदान को चावल प्रशासक, इंडियन माईनिंग एसोसिएशन अथवा सचिव, ज्वाईंट सप्लाई पूल के माध्यम से खरीदना होता है।