253 भारतीय मजदूर परिसंघ को सरकारी अंशदान - Page 313

298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

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* भारतीय मजदूर परिसंघ को सरकारी अंशदान

35. श्री लालचन्द नवलरायः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या उनका ध्यान 17 दिसम्बर, 1944 के सिन्ध ऑबजर्वर में ‘‘राय मेहता मड स्लिंगिंग ओवर रूपीज़ 13,000’’ शीर्ष के अंतर्गत प्रकाशित यूनाईटेड प्रैस के लेख की ओर आकृष्ट किया गया है जिसमें श्री जमनादास मेहता, एम.एल.ए., जो अब भारत सरकार के एक अधिकारी हैं, ने कहा है कि उनके पास उपर्युक्त विषय पर एक सरकारी पत्राचार है जिससे यह पता चलता है कि मजदूर परिसंघ का नाम इस शीर्ष के बारे में उसके अध्यक्ष या उसकी कार्य परिषद् की जानकारी के बिना पीठ पीछे इस्तेमाल किया गया है तथा साथ ही 13,000/- रुपए प्रति माह श्री राय द्वारा अपने लिए, लिये गए थे जिन्हें वे जैसा चाहें खर्च कर सकते थे_ और

(ख) उपरोक्त जानकारी की दृष्टि से, क्या माननीय सदस्य इस लोक धन के बारे में जानकारी देने की कृपा करेंगे कि यह किसे दिया गया था और किस प्रयोजन के लिए दिया गया था और इसका इस्तेमाल कैसे किया गया था, तथा क्या उसमें श्री राय ने अपनी इच्छा से धन का इस्तेमाल किया अथवा क्या उन्होंने इसका इस्तेमाल अपने निजी प्रयोजनों के लिए किया अथवा क्या उसे श्री जमनादास मेहता के साथ बांटा है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हां, स्वयं माननीय सदस्य द्वारा।

(ख) मैं 2 नवम्बर, 1944 को माननीय सदस्य के प्रश्न संख्या 31 के अपने उत्तर की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा।

श्री लालचन्द नवलरायः माननीय सदस्य ने मेरे प्रश्नों का निश्चित उत्तर नहीं दिया है। मैं भाग (ख) के बारे में जानना चाहता हूं कि क्या जो कुछ श्री जमनादास मेहता ने उस लेख में कहा है, वह सही है अथवा जो कुछ माननीय सदस्य ने इस प्रश्न के बारे में पिछली बार कहा था, वह सही था_ और क्या यह धन श्री जमना दास के लिए है, क्या यह श्री राय के लिए है अथवा दोनों के लिए है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने जो उत्तर दिया था उसमें मैं कुछ और जोड़ना नहीं चाहता।

* वही, खंड 1, 1945, 9 फरवरी, 1945, पृ. 87-88