254 खानों में भूमिगत श्रम करने वाली स्ति्रयों पर फिर से निष्ोध लागू - Page 316

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 301

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* खानों में भूमिगत श्रम करने वाली स्त्रियों पर

फिर से निषेध लागू

श्री टी.एस. अविनाशलिंगम चेट्टियारः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या खानों के भीतर स्त्रियों को काम करने देने की नीति की समीक्षा की गई है_

(ख) खानों में कितनी स्त्रियां काम कर रही हैं_ तथा

(ग) इस तथ्य की दृष्टि से कि खानों में काम करने वाली स्त्रियां ठीक ढंग से अपने शरीर पर कपड़े भी नहीं पहन सकतीं, क्या वह इस परिपाटी को पूरी तरह समाप्त करने के औचित्य पर विचार करेंगे?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) कोयला खानों में स्त्रियों के भूमिगत नियोजन पर पुनः निषेध लागू करने के प्रश्न की समीक्षा की गई है, जिसकी ओर सम्भवतः माननीय सदस्य का संकेत है।

(ख) आंकड़े भिन्न हैं, किन्तु फिलहाल लगभग 15,000-16,000 स्त्रियां कोयला

खानों में भूमिगत काम पर लगाई हुई हैं।

(ग) यह निषेध अस्थाई उपाय के रूप में ही हटाया गया है, और ज्यों ही हालत सुधरेगी त्यों ही उसे पुनः लागू कर दिया जाएगा।

मैं यह भी कहना चाहूंगा कि सभी स्त्री कामगारों को जो चाहे जमीन पर काम करती हों या जमीन के नीचे रियायती दर पर प्रति वर्ष दो साडि़यां दी जाती हैं जिसकी व्यवस्था विभिन्न खनन संघों द्वारा की गई है। कुछ खानों में साडि़यां मुफत दी जाती हैं और दूसरी खानों में आधी कीमत पर दी जाती हैं।

श्री टी.एस. अविनाशलिंगम चेट्टियारः प्रश्न यह नहीं था कि क्या उन्हें पहनने के लिए साडि़यां मिलती हैं? खानों में उनके लिए साड़ी पहनना असंभव है। इसलिए उन्हें साडि़यां भेंट करने या रियायती दरों पर देने का प्रश्न बिल्कुल असंगत है। मैं समझता हूं कि वे खानों में काम करते समय तगड़ी से ऊपर साड़ी नहीं लपेट सकती।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945, का खण्ड 1, 9 सितम्बर, 1945, पृष्ठ 104,