225 कोयला खानों में दुर्घटनाएं - Page 317

302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह बिल्कुल गलत है।

श्री टी.एस. अविनाशलिंगम चेट्टियारः आप कब फिर से निषेध लागू करने की आशा करते हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ज्यों ही परिस्थितियां ठीक हो जाएंगी।

श्री टी.एस. अविनाशलिंगम चेट्टियारः कौन-सी परिस्थितियां?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वे मेरे काबू में नहीं है और न ही मैं उनका पूर्वानुमान लगा सकता हूँ।

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* कोयला खानों में दुर्घटनाएं

52. श्री अब्दुल कय्यूमः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) कितने लोग 1943 और 1944 में कोयला खानों में काम करते हुए मर गए या घायल हो गए_

(ख) खानों में काम करने वाली स्त्रियों के लिए ‘‘पिट हैड बाथ्स’’ और उनके बालकों के लिए शिशु गृह की सुविधा देने के प्रस्ताव को प्रभावी रूप दिया गया है अथवा नहीं_ और

(ग) यदि नहीं तो देरी के क्या करण हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) 1943 में 290 मारे गए और 1320 घायल हुए। 1944 में 332 मारे गए और 1395 घायल हुए।

(ख) अब तक ‘पिट हैड बाथ्स’ की व्यवस्था केवल डिगवाडऱ्ीह खदानों की गई है। मध्य प्रांत की सात खदानों में और रानीगंज (बंगाल) की एक खदान में शिशु गृह (क्रैच) स्थापित कर दिए गए हैं।

(ग) भारत सरकार को देरी के कारणों की जानकारी नहीं है। यह भारतीय खान अधिनियम को संशोधित करने के सवाल पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है ताकि उन खान मालिकों को जो स्त्री कामगारों को काम पर लगाते हैं शिशु गृह चलाने के लिए बाध्य किया जा सके।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945, का खण्ड 1, 9 सितम्बर, 1945, पृष्ठ 109-10