256 दक्षिण भारत में खनिज भण्डार - Page 319

304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(घ) क्या यह सच है कि यदि संसाधनों का उचित रूप से पता लगाया जाए तो मद्रास प्रांन्त में ऊंची क्वालिटी की मृतिका (मिट्टी) की वस्तुएं बनाई जा सकती हैं_ क्या इस उद्योग के बारे में कोई छानबीन की गई है_ यदि नहीं, तो क्यों नहीं_

(च) क्या यह सच है कि कुछ दक्षिणी जिलों में रोगन बनाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण खनिज इल्मेनाईट प्राप्त किया जा सकता है_ क्या इस उद्योग को विकसित करने के लिए कोई स्कीम थी या प्रयत्न किया गया था_ यदि नहीं, तो क्यों नहीं_

(छ) क्या यह सच है कि मद्रास प्रान्त के कुछ तटवर्ती जिलों में अभ्रक बहुत बड़ी मात्रा में पाया जाता है_ यह उच्च दबाव के वैद्युत कार्य के लिए अनिवार्य

खनिज है_

(ज) क्या यह सच है कि अभ्रक का केवल खनन किया जाता है और विद्युत का सामान तैयार करने के लिए उद्योग शुरू करने का प्रयास किए बिना विदेशों को निर्यात कर दिया जाता है_

(झ) क्या भारत सरकार का विचार दक्षिण भारत में इन भण्डारों का अध्ययन करने के लिए एक केन्द्रीय अनुसंधान संगठन स्थापित करने का है_ यदि हाँ तो कब_ यदि नहीं तो क्यों नहीं_

(×ा) क्या यह सच है कि प्रायः वे सभी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थाएं जो वैज्ञानिक एवं उद्योग अनुसंधान ब्यूरो के अधीन शुरू की गई हैं और शुरू की जाने वाली हैं, उत्तरी भारत में स्थापित की जाएंगी_

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) धात्विकः क्रोमाइट, लोह अयस्क, इलमेनाइट तथा कोलमबाइट - टेन्टेलाइट।

अधात्विक- मृत्तिका सामग्री जिसके अंतर्गत कावलिन, फायर क्ले और अन्य प्रकार की पार्टियां, क्वार्टज़, फैल्सपर और सिलिमेनाइट, कोयला लिगनाइट और दुलर्भ भू-खनिज जिनके अंतर्गत मोनाजाईट, जि़रकोन तथा सामर्सकाइट भी हैं।

(ख) हाँ।

(ग) नहीं। अयस्क निम्न श्रेणी का होता है और पिघलने के लिए उपयुक्त आंच से सहयुक्त नहीं होता।

(घ) हाँ। किन्तु वैज्ञानिक सर्वेक्षण में आथि्र्ाक महत्व के भण्डार नहीं मिले हैं।

(घ) सम्भवतः। मद्रास सरकार ने इस सवाल पर ध्यान दिया है और मृत्तिका विशेषज्ञों को नियोजन किया है। भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण मद्रास में सामग्री के परिमाण और क्वालिटी पर अन्वेषण कर रहा है।