308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
260
* क्वार्टरों के आवंटन के बारे में श्रम विभाग द्वारा
प्रजातीय एवं धामि्र्ाक भेदभाव
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः आस्थगन प्रस्ताव की अगली सूचना सर सैयद रज़ा अली की है। वह ज्ञापन संख्या डब्ल्यू 11-4/114 तारीख 25 जनवरी, 1945 जारी करके यूरोपवासियों, आंग्ल-भारतीयों और भारतीय ईसाइयों के पक्ष में मकानों के आवंटन में श्रम विभाग द्वारा हाल में बरते गये प्रजातीय और धामि्र्ाक भेदभाव के लिए भारत सरकार की निन्दा करने के संबंध में है। मैं प्रभारी सदस्य से यह जानना चाहूंगा कि वास्तविक स्थिति क्या है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य) ः श्रीमान् मैंने विज्ञापन देखा है और मुझे यह बताया भी गया है कि ‘‘भारतीय’’ शब्द की बजाय, भूल से ‘‘भारतीय ईसाई’’ शब्द आ गए हैं। इन्हें ठीक कर दिया जाएगा ताकि कोई भी भेदभाव न रहे।
सर सैयद रजा अली (संयुक्त प्रांत के नगरः शहरी मुसलमान) ः मेरे विचार में, माननीय सदस्य के लिए यही सबसे ठीक रहेगा कि वह सदन में वक्तव्य दें और सारी बातें रिकार्ड में आ जाएं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने कार्यालय ज्ञापन सही कर दिया है और इसे परिवर्तित रूप में जारी कर दिया जाएगा।
सर सैयद रज़ा अलीः लेकिन सदन यह जानना चाहेगा कि आज-कल चर्चा क्या हो रही है। इस ज्ञापन का अर्थ क्या है और मेरे माननीय मित्र ने इसमें क्या सुधार किए हैं और उस सुधार का असर क्या होगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जो ज्ञापन शुरू में जारी किया गया था, वह इस प्रकार हैµ
‘‘600/- रुपए प्रति माह से कम वेतन पाने वाले अधिकारी को विहित करने के
लिए दिल्ली, नई दिल्ली और शिमला में उपलब्ध क्वार्टरों के पारम्परिक और
गैर-पारम्परिक प्रकारों में अंतर करने का सवाल विभाग के विचारधीन है। विभाग
की राय में, विचार करने के बाद यह फैसला किया गया है कि यह अन्तर अगले
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945 का खण्ड 1, 10 फरवरी, 1945, पृष्ठ 206