विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 309
ग्रीष्म सत्र से समाप्त कर दिया जाना चाहिए। यूरोप-वासियों, आंल-भारतीयों और
भारतीय ईसाइयों के संबंध में सम्पदा अधिकारी का समाधान हो गया है तथा
वे यूरोपीय आदतों वाले हैं, इसलिए उनके विषय में सम्पदा अधिकारी को यह
विवेकाधिकार दिया गया है कि वह उनके लिए ऊंचे डब्ल्यू.सी. युक्त निवास
स्थान (गैर-पारम्परिक क्वार्टर) आवंटित कर सकते हैं, बशर्तें कि वे ए.बी.सी
और डी टाइप के खास प्रवर्ग के आवास के लिए अन्यथा पात्र हों।’’
कालांतर में नियमों में आवश्यक संशोधन कर दिए जाएंगे। यह मूल ज्ञापन था, जो जारी किया गया था। संशोधित ज्ञापन में यह परिवर्तन कर दिया गया हैµ
‘‘सम्पदा अधिकारी में ऊंचे डब्ल्यू.सी. वाले निवास (गैर-पारम्परिक क्वार्टर) उन
अधिकारियों को आबंटित करने का विवेकाधिकार निहित किया गया है, चाहे वह
यूरोपीय हो, आंगल भारतीय हो या भारतीय जिन मामलों में उनका यह समाध
ान हो जाए कि वे यूरोपीय आदत वाले हैं, बशर्तें कि वे ए.बी.सी और डी में से
विशिष्ट प्रवर्ग के लिए अन्यथा पात्र हों।’’
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* वैस्टर्न कोर्ट के कमरों में आवास के लिए सैन्ट्रल
असेम्बली के सदस्यों के दावों की उपेक्षा
156. श्री अब्दुल कय्यूमः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) क्या वैस्टर्न कोर्ट में कुछ कमरे और अन्य आवास प्रधानतः असेम्बली के सत्रों अथवा प्रवर समितियों में भाग लेने वाले सेन्ट्रल असेम्बली के माननीय सदस्यों के लिए आरक्षित हैं_
(ख) क्या बीमा विधेयक पर प्रवर समिति के लिए स्थान आवंटित करते समय सदस्यों के दावों की उपेक्षा की गई है और नेशनल डिफेंस काँसिल के सदस्यों को प्राथमिकता दी जा रही है_ और यदि हां, तो क्यों_ तथा
(ग) क्या स्ैन्ट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली के पूर्व दावों पर भविष्य में उचित रूप से ध्यान दिया जाएगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) वैस्टर्न कोर्ट में 19 कमरे और 69 क्वार्टर सत्र के दौरान भारतीय विधान-मण्डल के माननीय सदस्यों के लिए आरक्षित
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945 का खण्ड 1, 14 फरवरी, 1945, पृष्ठ 323-24