270 स्त्री खनिकों के बालकों की देख-रेख के लिए इंतजाम - Page 333

318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ग) क्या (क) और (ख) में उल्लिखित इंतजाम किसी चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किए गए हैं और यदि हां तो किसके द्वारा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) अभी तक कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। लेकिन कुछ खानों में स्त्री परिचरों के साथ शिशु गृह की व्यवस्था की गई है और कुछ खदानों में बाल क्लीनिक चल रहे हैं, जहां खनिकों के बालकों को दूध बांटा जाता है। शिशु गृह की व्यवस्था की अपेक्षा करने का प्रश्न फिलहाल सरकार के विचाराधीन है।

(ख) बालकों को भूमिगत नहीं जाने दिया जाता और इसलिए भूमिगत कोई विशेष सुविधाएं देने की आवश्यकता नहीं है। माताओं को बच्चों के जन्म के एक माह के भीतर भूमि के नीचे जाने की इजाजत नहीं है। अपने बालकों को दूध पिलाने के लिए अन्य माताओं को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगी जा रही है।

(ग) नहीं।

श्रीमती के. राधा बाई सुब्बारायणः श्रीमान्, क्या यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या सरकार उन खानों में स्त्रियों को भूमिगत काम करने से निषिद्ध करेगी जहां ये इंतजाम नहीं किए गए हैं, जब तक कि सरकार इस प्रश्न पर विचार न करे?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं आपका सवाल नहीं समझा।

श्रीमती के. राधा बाई सुब्बारायणः क्या सरकार बालकों की देख-भाल के लिए स्त्रियों को भूतल पर आकर अपने बालकों को दूध पिलाने में समर्थ बनाने के लिए उचित इंतजाम करने के लिए निश्चित कदम उठाएगी? निश्चय ही एक महीने के बाद भी शिशुओं को दूध पिलाए जाने की आवश्यकता होती है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जब तक मैं यह जान लूं कि समस्या कितनी बड़ी है, तब तक मैं किसी निश्चय पर नहीं पहुंच सकता। मैंने जानकारी मांगी है।

श्रीमती के. राधा बाई सुब्बारायणः माननीय सदस्य ने स्वयं यह माना है कि यह समस्या बहुत गंभीर है, इसलिए क्या सरकार स्त्रियों को तब तक भूमिगत काम करने से मना करेगी, जब तक वह समस्या पर विचार करना समाप्त करे।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे नहीं मालूम कि क्या ऐसी कुछ स्त्रियां हैं जो भूमिगत नन्हें शिशुओं को दूध पिलाती हैं।