270 स्त्री खनिकों के बालकों की देख-रेख के लिए इंतजाम - Page 334

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 319

श्री मनु सूबेदारः क्या माननीय सदस्य उन खानों में, जिनमें शिशु गृह और उनके द्वारा वर्णित अन्य सुविधाएं नहीं है, स्त्रियों का भूमिगत काम करना बन्द करेंगे?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा हूं कि प्रत्येक खान के पास शिशु गृह हों।

श्री मनु सूबेदारः क्या माननीय सदस्य तब तक उनमें स्त्रियों का काम करना बन्द करेंगे?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि एकमात्र यही अनुकल्प है तो इस प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है।

प्रो. एन.जी. रंगाः क्या सरकार शिशुओं को दूध पिलाने वाली माताओं को भूमिगत काम करने की अनुमति देने या न देने के औचित्य के संबंध में इस प्रश्न के भाग (ग) के बारे में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् से परामर्श करेगी?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता कि वे इस विषय में सरकार को सलाह देने की जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे अथवा नहीं?

प्रो. एन.जी. रंगाः मैं यह पूछ रहा हूं कि क्या सरकार उनसे पूछने के लिए तैयार होगी? भले ही वे सलाह देने के लिए तैयार हों या नहीं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं समझा कि यह कोई समस्या है जिस पर परामर्श आवश्यक हो।

श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः क्या मुझे यह पूछने की अनुमति है कि अपने पिछले अधिवेशन में अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन ने इस विषय पर कुछ सुझाव दिए थे?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस समय मेरे पास कोई भी जानकारी नहीं है।

श्रीमती रेणुका रेः क्या यह बात सच है कि अधिकांश खानों में ये शिशु गृह तभी ठीक से काम करते हैं जब विजीटर वहां जाते हैं और जब सरकार के निरीक्षक पहले से व्यवस्थित दौरों पर वहां जाते हैं और यह कि खनिकों के बालक जो आस-पास के क्षेत्रों में रहते हैं उन्हें शिशु गृह में रहने की इजाजत नहीं दी जाती तथा वहां भी शिशुओं या बालकों की देख-रेख के लिए अधिकांश केन्द्रों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं है, जहां शिशु गृह, बहुत कम अपवादों को छोड़कर, केवल नाम के लिए विद्यमान हैं।