271 खनन क्षेत्रें में खान प्रसूति लाभ अधिनियम लागू करने के लिये कार्यवाही - Page 335

320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता कि माननीय सदस्य को यह कैसे मालूम है कि वहां, शिशु गृह नहीं है, जबकि वे वहां न जाते हैं और न दौरा करते हैं।

श्री एन.एम. जोशीः माननीय सदस्य खनन क्षेत्रों में गई थी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं भी गया हूँ।

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* खनन क्षेत्रों में खान प्रसूति लाभ अधिनियम

लागू करने के लिये कार्यवाही

437. श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) खनन क्षेत्रों में खान प्रसूति लाभ अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, क्योंकि स्त्री खनिक अशिक्षित होती है, और अपने अधिकारों से अनभिज्ञ होती हैं_

(ख) क्या सरकार के पास इस अधिनियम के 1941 में पारित किए जाने के बाद इसे लागू करने के बारे में कोई सूचना है_

(ग) क्या बच्चे के जन्म के पहले और बाद चार सप्ताह की अनुपस्थिति स्त्री

खनिकों को उचित राहत देने के लिए और उनके स्वास्थ्य को खराब होने से बचाने के लिए पर्याप्त सिद्ध नहीं हुई है_ और

(घ) क्या सरकार ने (ग) में उल्लिखित विषय पर चिकित्सीय राय प्राप्त की है, और यदि हां, तो क्या सरकार उसकी एक प्रतिलिपि सदन के पटल पर रखेगी_ और यदि नहीं तो क्या सरकार का ऐसी राय प्राप्त करने के लिए कदम उठाने का विचार है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) एक ज्येष्ठ श्रम निरीक्षक और दो कनिष्ठ श्रम निरीक्षक जो अर्हित डॉक्टर हैं, भारत में मुख्य खान निरीक्षक के अधीन नियुक्त किए गए हैं।

(ख) यद्यपि अधिनियम के कार्यान्वयन के बारे में स्वयं सरकार को रिपोर्ट नहीं मिली है, फिर भी मुख्य खान निरीक्षक के अधीन निरीक्षक उन्हें नियमित रूप से रिपोर्टें प्रस्तुत करते हैं और खान विभाग द्वारा उपयुक्त कार्रवाई की जाती है।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945, का खण्ड 1, 21 फरवरी, 1945, पृष्ठ 1408-09.