322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः मेरे विचार में इसका उल्लेख उस रिपोर्ट में किया गया है जो सरकार ने हमें भेजी है?
श्रीमती रेणुका रेः चूंकि माननीय सदस्य समझते हैं कि उन्होंने स्त्रियों के भूमिगत काम करने का निषेध करने वाले अन्तरराष्ट्रीय कर्न्वेशन की उपेक्षा करके उचित कार्य किया है, इसलिए मैं यह जानना चाहती हूँ कि क्या वह अन्तरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के प्रसुति लाभ संबंधी प्रावधान पर विचार करना भी अनावश्यक समझते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उस पर विचार कर रहा हूँ।
272
* परम्परागत और गैर-परम्परागत क्वार्टरों में अन्तर समाप्त करना
451. श्री एच.ए. सत्तार एच इशाक सैतः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) किन कारणों से परम्परागत और ग-परम्परागत क्वार्टरों के अन्तर को समाप्त करने का फैसला करना पड़ा, जैसा कि श्रम विभाग के ज्ञापन तारीख 25 जनवरी, 1945 में लिखा है_ और
(ख) इस विनिश्चय का (i) ऐसे क्वार्टरों के वर्तमान अधिभोगियों पर, और (ii) उन पर जो भविष्य में इन क्वार्टरों के लिए पात्र हैं, क्या प्रभाव पड़ा है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) अब तक लोक आवंटन नियमों के अनुसार आवास के आवदेकों को या तो परम्परागत क्वार्टरों के लिए आवेदन करना होता था अथवा गैर-परम्परागत क्वार्टरों के लिए और जो एक प्रकार के क्वार्टर के लिए आवेदन करते थे, उन्हें दूसरी प्रकार के क्वार्टर के लिए अपात्र समझा जाता था। आवास की वर्तमान कमी की दृष्टि से उपरोक्त नियमों का कार्यान्वयन प्रायः इन क्वार्टरों के लिए पात्र अधिकारियों के लिए हानिकारक रहा और उनसे यह असंगत परिणाम निकला कि यदि आवेदक उस प्रकार का आवास प्राप्त नहीं कर पाता है जिसके लिए उसने आवेदन किया था, तो उसे बिना आवास के ही रहना होगा, भले ही वह दूसरे प्रकार का आवास प्राप्त कर सकता था, यदि वह उस प्रकार के लिए विशेष रूप से आवेदन करता।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945 का खण्ड 1, 21 फरवरी, 1945, पृष्ठ 618