विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 323
इसके अतिरिक्त, क्वार्टरों के दो प्रकारों में अनतर रखने से सम्पदा कार्यालय में अतिरिक्त काम बढ़ गया, क्योंकि दोनों प्रकार के क्वार्टरों के आवंटन को अलग-अलग रखना होता था। इसके अलावा यह भी महसूस किया गया कि परम्परागत और गैर-परम्परागत क्वार्टरों में अन्तर रखना और उसी आधार पर उनका आवंटन बहुत पुराना पड़ गया है।
(ख) (i) कोई नहीं।
(ii) 25 जनवरी, 1945 के विनिश्चय को 15 फरवरी, 1945 को हल्का-सा उपान्तरित किया गया है। जो लोग ए, बी, सी, और डी टाइप के आवास के प्रवर्ग विशेष के लिए पात्र हैं वे दोनों प्रकार के क्वार्टरों के लिए आवेदन करने के लिए पात्र होंगे।
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* खानों में महिला कामगारों की मृत्यु
453. श्री के.एस. गुप्ताः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि सन् 1942-43 और 1944 में (i) बीमारियों तथा (ii) दुर्घटनाओं के कारण भारत की खानों में (जिनके अंतर्गत कोयला खान भी हैं) कितनी महिला कामगारों की मृत्यु हुई है_
(ख) क्या यह सच है कि कोयला खानों में काम करने के लिए पुरुष कामगार सुलभ नहीं है, क्योंकि जो मजदूरी उन्हें दी जाती है, वह खाद्य पदार्थों और जीवन की अन्य आवश्यकताओं की कीमत में हुई वृद्धि के अनुरूप नहीं है_
(ग) क्या खान मालिकों द्वारा भारत सरकार की ओर से खान कामगारों को बेहतर मजदूरी देने के लिए उन्हें खाने की चीजें तथा आवास सुविधा देने के लिए जीवन की विशेष सुविधाएं देने के लिए कोई प्रयत्न किया गया है, ताकि पुरुष कामगार पर्याप्त मात्रा में आकर्षित किए जा सके, जिससे कि सरकार स्त्रियों के भूमिगत काम करने पर निषेध लागू कर सके और इस प्रकार, प्रत्येक अन्य सभ्य देश की भांति, भारत में नारीत्व की गरिमा की रक्षा कर सकें_
(घ) क्या यह सच है कि मां का दूध मिलने के कारण खनन क्षेत्रों में शिशुओं की मृत्यु दर बहुत अधिक है क्योंकि ये स्त्रियां भूमिगत कठोर और कठिन काम करने के कारण स्वतः सूख जाती है_
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945 का खण्ड 1, 21 फरवरी, 1945, पृष्ठ 620