324 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(घ) क्या यह सच है कि खनन क्षेत्रों में कामगारों के लिए शुद्ध दूध उपलब्ध नहीं होता_
(च) क्या खान मालिकों और सरकार ने विभन्न खनन क्षेत्रों में कम से कम एक साल से नीचे के बालकों के लिए निःशुल्क दूध देने के प्रयत्न किए हैं_ और यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) वर्ष 1942, 1943 और 1944 के दौरान भूतल पर और भूमिगत दोनों जगह घटनाओं के कारण भारत में सभी खानों में स्त्रियों की मृत्यु संख्या क्रमशः 9, 11 और 53 थी। बीमारी से मरने वाली महिलाओं के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
(ख) नहीं।
(ग) हँं। मजदूरी, कल्याण और सुविधाओंं के बारे में निम्नलिखित सुधार लागू किए गए_
(1) खाने की चीजों में आर्थिक सहायता और अनाज की दुकानों की
व्यवस्था_
(2) बेहतर स्वास्थ्य उपाय, जिनके अंतर्गत मलेरिया नियंत्रण और अस्पतालों
के निर्माण के लिए बेहतर प्रावधान भी शामिल हैं_
(3) खाने-पीने की पर्याप्त चीजों की व्यवस्था_
(4) काम पर आने-जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था_
(5) रेलवे खदानों में कोयले के संग्रह की दरों में वृद्धि जिससे कि ठेकेदार
मजदूरों को और अधिक आकर्षक मजदूरी दे सकें_ और
(6) खदान मजदूरों की मजदूरी में वृद्धि के लिए सरकार और खान मालिकों
के बीच अनौपचारिक समझौता।
(घ) यह नहीं कहा जा सकता है कि दूध की कमी के कारण खनन क्षेत्रों में शिशुओं की मृत्यु-दर बहुत अधिक है। कोयला क्षेत्रों में शिशुओं की मृत्यु के आंकड़े अखिल भारतीय-आंकड़ों से कम हैं।
(घ) खनन क्षेत्रों में शुद्ध दूध उपलब्ध है। माईन्स बोर्ड ऑफ हैल्थ द्वारा नियोजित निरीक्षक दूध के नमूने बार-बार लेते हैं और उसकी जांच करते हैं तथा जब मिलावट पाई जाती है, तो उस पर कार्रवाई की जाती है।
(च) नहीं। सरकार खनन क्षेत्रों में स्त्रियों और बालकों के स्वास्थ्य में सुधार के बारे में और अधिक सम्भावनाओं पर विचार कर रही है।