275 कोयला खानों में काम करने के लिए गोरखपुर के मजदूरों को भर्ती करने की योजना - Page 342

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 327

किस अवधि तक इन लेखाओं की सम्परीक्षा पूरी हो चुकी है_ और क्या लेखाओं की सम्परीक्षा के फलस्वरूप कोई नीति संबंधी या लेखा संबंधी अनियमितता प्रकाश में आई है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) विभिन्न सरकारी कर्मशालाओं में एवं कोयला क्षेत्रों में काम पर लगाने के लिए मजदूरों की भर्ती गोरखपुर लेबर सप्लाई डिपो द्वारा संयुक्त प्रांत में की जाती है। इन्हें निम्नलिखित सुपरवाईजरों के अधीन टोलियों में संगठित किया जाता हैः

पचास आदमियों की हर टोली के लिए एक सरदार, 250 आदमियों के प्रत्येक

दल के लिए एक यूनिट सुपरवाईजर 1000 आदमियों के प्रत्येक शिविर के लिए

एक सुपरवाईजर_ जगह के अनुसार एक या अधिक शिविरों के कर्मिकों का

प्रभारी एक ग्रुप ऑफिसर।

इन मजदूर शिविरों के लिए सीधे जिम्मेदार अधिकारी उप-निदेशक मजदूर सप्लाई (कोयला) है जिसका मुख्यालय धनबाद में है।

मजदूरों को कार्य स्थल पर 6 माह के लिए या एक साल के लिए अथवा तब तक के लिए जब तक आवश्यकता रहे, इनमें से जो भी अवधि कम हो, के लिए भर्ती किया जाता है। प्रत्येक मजदूर को मजरी, कपड़ा और कम्बल का एक-एक सैट दिया जाता है। उसे आरंभिक खर्च पूरा करने के लिए अग्रिम धन भी दिया जाता है और मुफत आवास, चिकित्सा सहायता, खाना पकाने का ईंधन और राशन भी दिया जाता है। अच्छे काम और लम्बी सेवा के बोनस के अतिरिक्त उसे विनिर्दिष्ट वेतनमानों के आधार पर किए गए काम के लिए पारिश्रमिक दिया जाता है।

(ख) खानों में काम के लिए अब तक भर्ती किए गए मजदूरों की कुल संख्या 33,500 है। इस समय काम करने वालों की संख्या 15,000 है।

जनवरी 1945 के अंत तक कुल व्यय 74,16,584 रुपए किया गया।

वसूलियां

जनवरी, 1945 के मध्य तक के ः साढ़े चौदह लाख रुपए।

बिल की कुल रकम

वास्तविक वसूलियां ः पांच लाख रुपए

(ग) जब गौरखपुर के मजदूर खदान के इलाकों में काम करते हैं तो वे निम्नलिखित मजदूरी और सुविधाओं के लिए हकदार होते हैं_ µ

मूल वेतन µ 12 आने प्रति दिन।