328 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
उत्पादन बोनस µ 4 आने प्रति दिन।
भूमिगत काम करने के लिए अतिरिक्त भत्ता - 4 आने प्रति दिन।
इसके अतिरिक्त वह पूरी खुराक के लिए मुफत खाद्य पदार्थ पाता है जिसकी अनुमानित लागत लगभग 14 आने प्रति दिन होती है। वे मुफत आवास व मुफत चिकित्सा सहायता के लिए भी हकदार हैं।
गोरखपुर के मजदूर समग्रतः स्थानीय मजदूरों की अपेक्षा बेहतर शर्तों पर काम करते हैं।
स्थानीय खदान मजदूर जो पाता है वह इस प्रकार हैंःµ
(i) नकद मजदूरी के रूप में युद्ध-पूर्व स्थानीय मजदूरी की दरों से 50 प्रतिशत
अधिक - युद्ध-पूर्व मजदूरी दरें औसत कामगारों के लिए भूतल पर काम करने
वालों की दशा में लगभग आठ आने और भूमिगत काम करने वालों की दशा
में 14 आने_
(ii) खाद्य रियायतें इस प्रकार हैंः
हर रोज की हाजिरी के लिए आधा सेर मुफत चावल।
एक रुपए में 6 सेर की रियायती दर पर पर्याप्त दाल की सप्लाई।
इसके अलावा और भी चावल दाल जो उसे नियंत्रित दर पर चाहिए।
वर्तमान रियायती दरों का आशय स्वयं खनिक के लिए रियायती दर पर पूरा राशन देना है और अपने परिवार के लिए उससे नियंत्रित दर अदा करने की अपेक्षा करना है। ये रियायतें पिछली मई में शुरू की गई थीं, लेकिन पहले ये रियायतें कामगारों के परिवारों तक को दी गई थीं और अनाज की ज्यादा मात्रा के लिए थी। कामगारों को अब, अविवाहित की दशा में, उसके बदले दो आना और विवाहित बालकों वाले व्यक्ति की दशा में, पांच आने अतिरिक्त रोकड़ भत्ता दिया जाता है।
खदान मालिकों सहित विभिन्न स्रोतों की रिपोर्टों से पता चलता है कि गोरखपुर के मजदूर बहुत तरह के काम कर लेते हैं, जैसे शिविर बनाना, उत्खनन स्कीमों में ऊपर के बोझ को हटाना, वैगनों में कोयला लादना एवं कोयला तोड़ना। यह भी सूचना है कि वे काम पर नियमित रूप से आते हैं, और सही पर्यवेक्षण के अधीन उनका उत्पादन उतना ही होता है, जितना किसी भी अन्य मजदूर का।
(घ) (1) श्री वाल्श - उप-निदेशक, मजदूर आपूर्ति (कोयला) वेतन 1,925/-
रुपए प्रति माह