विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 329
(2) श्री मारिस - सहायक निदेशक कोयला (उत्पादन), वेतन 1215/-
रुपए प्रति माह
श्री वाल्श गोरखपुर मजदूरों से संबंधित सभी विषयों के पूर्ण प्रभारी हैं, जिनमें राशन, वेतन आवास और कल्याण भी शामिल हैं। उन्हें संयंत्र का 12 वर्ष का अनुभव है, वह प्रशासनिक हैसियत में तीन वर्ष आर्मी स्टाफ अफसर और संख्या तीन इण्डियन रिज़र्व बेस में दस महीने तक लेबर स्टाफ ऑफिसर रहे जहां उन्हें गोरखपुर मजदूरों के मूल संगठन को एकीकृत बल में ढालने का श्रेय प्राप्त था।
श्री मौरिस कार्य स्थल पर मजदूरों, कार्य उत्पादन, औजारों और परिवहन की व्यवस्था के प्रभारी हैं। उन्होंने भारत और बर्मा में पिछले 25 सालों के दौरान विभिन्न वर्गों के मजदूरों से काम लिया है। पिछले दो सालों के दौरान उन्होंने पायानियर बटालियन बनाई है और उसके कमाण्डर रहे।
(घ) शुरू में यह खर्च ‘‘एडवांस रिपेयेबल - स्पेशल एडवांसिज’’ शीर्ष के अंतर्गत डेबिट किया जाता है, जबकि खान मालिकों से की गई वसूलियां प्राप्ति शीर्ष ‘‘XXXI/I — प्रकीर्ण विभाग’’ में जमा की जाती हैं। किए गए खर्च और वसूलियों में जो अन्तर रहता है उसे कोयला उत्पादन कोष से पूरा किया जाता है। लेखापरीक्षा विभाग खर्च की लेखापरीक्षा के लिए जिम्मेदार है। अब तक लेखापरीक्षा या लेखाओं की कोई अनियमिताएं सामने नहीं आई हैं।
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* लेजिस्लेटिव असेम्बली और कौंसिल ऑफ स्टेट्स
के वादविवाद का देरी से प्रकाशन
(1944 शरद्कालीन सत्र)
13. श्री अनंग मोहन दासः क्या माननीय सदन के नेता यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) किन तारीखों को लेजिस्लेटिव असेम्बली और कौंसिल ऑफ स्टेट्स के शरद्कालीन सत्र (नवम्बर) 1944 के वाद-विवाद माननीय सदस्यों को सप्लाई करने के लिए उपलब्ध कराये गये_ और
(ख) किन कारणों से उस वाद-विवाद का देरी से प्रकाशन हुआ है?
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945 का खण्ड 1, 21 फरवरी, 1945, पृष्ठ 630