278 त्रिपक्षीय (श्रम) सम्मेलनों के लिए कर्मचारी शिष्टमण्डल का गठन - Page 346

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 331

(vi) भारत सरकार के श्रम विभाग को श्रम पर्यवेक्षक के लिए उन मुद्दों पर

किस प्रकार के अभ्यावेदन किए गए जहां पर्यवेक्षक और रेल प्रशासन या

बोर्ड के बीच मतभेद हैं_ तथा

(vii) उपरोक्त (vi) में उल्लिखित मुद्दों पर दिया गया फैसला?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) वर्ष 1940-41 से मजदूर संदाय अधिनियम तथा वर्ष 1941-42 और 1942-43 के लिए आवर्स ऑफ एम्प्लायमेंट एण्ड रेगुलेशन्स के कार्यान्वयन के बारे में वार्षिक रिपोर्टें समझौता अधिकारी (रेलवेज़) और रेल श्रम पर्यवेक्षक द्वारा पेश की गई। जैसा कि मैंने माननीय सदस्य को 10 फरवरी, 1944 को उनके अतरांकित प्रश्न संख्या 43 के उत्तर में बताया था, सरकार में कागज की भारी कमी को देखते हुए इन रिपोर्टों को प्रकाशित न करने का फैसला किया है। फिर भी उसने 1942-43 की रिपोर्टों की बाबत तथा भावी रिपोर्टों के बाबत भी एक प्रैस नोट जारी करने का फैसला किया है, जब तक कि ऐसा समय न आ जाए कि उन्हें प्रकाशित करने की पुरानी परिपाटी को फिर से चालू करना संभव हो सके।

(ख) ऐसी जानकारी जो तुरन्त उपलब्ध है, संकलित की जा रही है और कालांतर में एक विवरण सदन के पटल पर रख दिया जाएगा।

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* त्रिपक्षीय (श्रम) सम्मेलनों के लिए कर्मचारी

शिष्टमण्डल का गठन

@ 533. श्री लालचन्द नवलरायः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलनों अथवा स्थाई समिति के लिए कर्मचारी शिष्टमण् डल में (i) भारतीय मजदूर परिसंघ_ (ii) आल इंण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस_ तथा (iii) अन्य कामगारों के प्रतिनिधि शामिल हैं_

(ख) ‘अन्य कामगारों’ के प्रवर्ग (iii) में कौन-कौन से उद्योग और कामगार शामिल हैं और उनके प्रतिनिधि किस प्रकार निर्वाचित या नामांकित किए जाते हैं_

* विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 28 फरवरी, 1945, पृष्ठ 798 @ प्रश्नकर्ता उपस्थित न होने के कारण प्रश्न का उत्तर सभा पटल पर रख दिया गया।