279 हाईड्रो-इलैक्टि्रक स्कीमें - Page 347

332 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ग) यदि अन्य कामगारों के प्रतिनिधि सरकार द्वारा नामांकित किए जाते हैं, तो क्या इस परिपाटी को बन्द करने का विचार है_ और यदि नहीं, तो क्यों नहीं_ और

(घ) सरकार इन प्रतिनिधियों का किस आधार और किन बातों पर नामांकित करती है_ क्या ऐसे नामांकनों में प्रांतीय सरकार का भी कोई हाथ होता है_ और यदि हां, तो कितना_

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हां।

(ख), (ग) और (घ), प्रवर्ग (iii) का संबंध श्रमिकों के हितों से है, जिनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व दो अखिल भारतीय श्रम संगठनों अर्थात् आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस तथा भारतीय मजदूर परिसंघ द्वारा नहीं हुआ है। नामांकन भारत सरकार द्वारा प्रांतीय सरकारों से प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद किए जाते हैं। फिलहाल इस परिपाटी को बन्द करने का कोई इरादा नहीं है। देश में कामगारों के संगठनों के विकास के वर्तमान चरण में ऐसा नामांकन आवश्यक है।

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* हाईड्रो-इलैक्ट्रिक स्कीमें

539. श्री मनु सूबेदारः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि इस समय भारत में कितनी हाईड्रो-इलैक्ट्रिक स्कीमें चल रही हैं_

(ख) उनमें से प्रत्येक द्वारा कितनी विद्युत पैदा की जाती है_ और

(ग) उसमें से कितनी विद्युत औद्योगिक प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल की जाती है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) निजी उद्योग और सैनिक अधिष्ठानों को छोड़कर 34.

(ख) अलग-अलग केन्द्रों के बारे में जानकारी देना संभव नहीं है। इन सभी केन्द्रों द्वारा पैदा की गई कुल विद्युत लगभग 1983 लाख के.डब्ल्यू.एच. है।

(ग) लगभग 56 प्रतिशत।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 28 फरवरी, 1945, पृष्ठ 804.