338 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(ख) क्या संयुक्त प्रान्त के गोरखपुर, बलिया और अन्य जिलों से अकुशल मजदूरों की भर्ती और कोयला क्षेत्रों में उन्हें रखने की लागत उपकर से प्राप्त राशि में से खर्च की जाती है_
(ग) मजदूरों को (स्त्रियों सहित) कौन-सा संविदा फार्म हस्ताक्ष्र करना होता है_ क्या सरकार उस आदेश की एक प्रतिलिपि सदन के पटल पर रखेगी, जिसके अनुसार मजदूर भर्ती किए जाते हैं, और उनका संविदा फार्म भी सदन के पटल पर रखेगी_
(घ) उन्हें भर्ती करने के लिए क्या मशीनरी है_
(घ) आमतौर पर वे कहां ठहराये जाते हैं_
(च) 31 दिसम्बर, 1944 को विभिन्न कोयला क्षेत्रों के इन मजदूरों की अनुमानित संख्या कितनी थी_
(छ) क्या उनके लिए अलग-अलग शिविर लगाए गए हैं_ यदि हां, तो क्या उन्हें शौचालय और स्नानागार की सुविधाएं दी जाती हैं_ और
(ज) अब तक मजदूरों की कितनी टोलियां भेजी जा चुकी हैं और उनकी संख्या कितनी है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हाँ।
(ख) शुरू में सरकार खर्च पूरा करती है। उसका एक भाग खान मालिकों से लिया जाता है और शेष उत्पादन उपकर निधि में से पूरा किया जाता है।
(ग) मजदूर लोग किसी संविदा फार्म पर हस्ताक्षर नहीं करते। वे 6 या 12 महीने के लिए काम करने के लिए मौखिक रूप से राजी जो जाते हैं।
(घ) लेबर सप्लाई डिपो गोरखपुर, जो संयुक्त प्रांत की सरकार द्वारा चलाया जाता है।
(घ) बंगाल और बिहार कोयला क्षेत्र तथा हैदराबाद में सिंघरेनी खदान।
(च) (i) बंगाल/बिहार योजना क्षेत्र ः 15,400
(ii) सिंघरेनी खादान ः 2,500
(छ) हां अधिकांश शिविरों में शौचालय की व्यवस्था है और यह व्यवस्था शीघ्र ही सब जगह कर दी जाएगी। लेकिन स्नानागार नहीं है। फिर भी पर्याप्त पानी की सुविधा प्रदान की जाती है।