विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 341
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) खनन मजदूर शिविरों में कामगारों को राशन सरकार द्वारा समूह अधिकारियों के पर्यवेक्षण में ठेकेदार के माध्यम से दिया जाता है।
(ख) राशन प्रत्येक टोली के लिए थोक में हर सप्ताह दिया जाता है।
(ग) नहीं।
(घ) नहीं, क्योंकि उन्हें मुफत सरकारी राशन दिया जाता है।
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* कोयला खान कामगार शिविरों में शारीरिक दण्ड
568. प्रो एन.जी. रंगाः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि इन कोयला खान मजदूर शिविरों में कामगारों को शारीरिक दण्ड दिया जाता है_ क्या स्त्री और पुरुष दोनों के साथ ऐसा है_
(ख) क्या इन कामगारों की शिकायतों को दूर करने के लिए कोई मशीनरी है_
(ग) क्या भारत सरकार के श्रम कल्याण सलाहकार और उसके सहायक अथवा कोयला खान कल्याण आयुक्त और उनके अधीनस्थ अधिकारी इन कामगारों के कल्याण की देख-रेख के लिए अथवा उनकी शिकायतों के बारे में जांच करने के लिए सशक्त हैं_ यदि नहीं, तो क्यों नहीं_
(घ) यदि हां, तो उनकी शिकायतों की छानबीन कौन करता है_ और
(घ) क्या इन मामलों का कोई रिकार्ड रखा जाता है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) नहीं। स्त्रियों के कोई शिविर नहीं है।
(ख) हां, कामगार अपनी शिकायतों के निवारण के लिए उप-निदेशक, श्रमिक आपूर्ति (कोयला) के पास जा सकते हैं।
(ग) नहीं। ये मजदूर शिविर उप-निदेशक, श्रमिक आपूर्ति (कोयला) और उसके कर्मचारी-वृन्द की देख-रेख में चलते हैं।
(घ) मुख्य सम्पर्क अधिकारी और अनस्किल्ड लेबर सप्लाई डायरक्टरेट के समूह अधिकारी।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 28 फरवरी, 1945, पृष्ठ 820