342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(घ) यदि लिखित रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं तो उपनिदेशक, श्रमिक आपूर्ति (कोयला) के कार्यालय में रिकार्ड रखे जाते हैं। मौखिक शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। जहां आवश्यक समझा जाता है, रिकार्ड रखा जाता है।
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* अभ्रक आयोग
661. श्री मनु सूबेदारः (क) क्या माननीय श्रम-सदस्य अभ्रक आयोग नियुक्त करने का उद्देश्य बताने की कृपा करेंगेः
(ख) उसे क्या काम सौंपे गए थे और उसकी रचना किस प्रकार की गई थी_
(ग) सरकार ने इस देश के अभ्रक उत्पादकों को किसी भी समय क्या सहायता दी है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) और (ख) माननीय सदस्य का संकेत सम्भवतः अभ्रक जांच समिति से है। उनका ध्यान संकल्प संख्या एमडी-55 तारीख 15 मई, 1944 और 23 अक्टूबर, 1944 की ओर दिलाया जाता है। इनकी प्रतिलिपियाँ भारतीय विधान-मण्डल के पुस्तकालय में रख दी गई है।
(ग) भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत खनिज विकास सिवाय उस सीमा तक प्रांतीय विषय है जो परिसंघीय विधि द्वारा लोक हित में समीचीन घोषित किया गया है। इस समय ऐसी कोई परिसंघीय विधि अस्तित्व में नहीं है, बल्कि
खनिज विकास का काम पूरी तरह प्रांतीय सरकारों पर छोड़ दिया गया है। लेकिन इस पर भी युद्ध के दौरान केन्द्रीय सरकार ने अभ्रक उत्पादकों को माल प्राप्त कराने में उनकी मदद करके और अधिक उत्पादन पर बोनस को अधिलाभ कर से मुक्त करके काफी करके काफी सहायता दी है।
श्री मनु सूबेदारः क्या यह सच है कि सरकार ने अभ्रक की कीमत निश्चित कर दी है और यह कि अभ्रक थोक में इस सरकार से और सम्बद्ध सरकारों से नियंत्रित कीमत पर खरीदा गया है तथा यह कि यह नियंत्रण केन्द्रीय सरकार द्वारा लगाया गया है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कीमत नियत कर दी गई है।
श्री मनु सूबेदारः क्या मुझे यह बताने का कष्ट करेंगे कि ये कीमत युद्ध से पूर्व की कीमतों की तुलना में कितनी है?
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 5 मार्च, 1945, पृष्ठ 1022-23