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344 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

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* परम्परागत और गैर-परम्परागत क्वार्टरों में अन्तर की समाप्ति

662. श्री टी.टी. कृष्णामाचारीः (क) परम्परागत और गैर-परम्परागत क्वार्टरों में अन्तर समापत करने के बारे में 10 फरवरी, 1945 को आस्थगन प्रस्ताव के माननीय श्रम सदस्य के उत्तर के संदर्भ में, क्या वह यह बताने की कृपा करेंगे कि सरकार के अन्य विभागों से परामर्श लिया गया था और भारत सरकार के कौन-कौन से और कितने विभाग इस अन्तर को समाप्त करने के प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में थे_

(ख) क्या सम्पदा अधिकारी में अब तक गैर-परम्परागत क्वार्टर की इजाजत देने का विवेकाधिकार निहित रहा है_ यदि नहीं, तो अब विवेकाधिकार क्यों दिया गया है_

(ग) सम्पदा अधिकारी किस पद्धति या मशीनरी से अपना यह समाधान कर पाएगा कि वह आवेदक, जो भारतीय है, और यूरोपीय आदतों वाला होने के कारण गैर-परम्परागत क्वार्टर के लिए पात्र हो गया है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हां। सरकार उन विभागों को बताना आवश्यक नहीं समझती जो प्रस्ताव के विपक्ष में या पक्ष में थे।

(ख) नहीं। सम्पदा अधिकारी को गैर-परम्परागत क्वार्टर आवंटित करने में कोई विवेकाधिकार नहीं होगा, क्योंकि सरकार ने यह फैसला किया है कि अपने रहन-सहन के ढंग की बाबत आवेदक द्वारा की गई घोषणा निःसंदेह स्वीकार की जानी चाहिए।

(ग) प्रश्न नहीं उठाता।

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@ परम्परागत और गैर-परम्परागत क्वार्टरों में अन्तर की समाप्ति 663. श्री टी.टी. कृष्णामाचारीः (क) क्या माननीय सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या पिछले प्रश्न में वर्णित, उसी विषय पर आस्थगन प्रस्ताव के सम्बंध में इसी महीने की 10 तारीख को उनके उत्तर के अनुसार गैर-परम्परागत क्वार्टरों के अस्थायी धारणाधिकार-प्राप्त लोगों को हटाने का विचार है_ यदि हां, तो क्या उन्हें उसी टाइप की

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 5 मार्च, 1945, पृष्ठ 1023 @ वही, पृष्ठ 1023-24