293 @ दिल्ली में भू-सम्पदा लेन-देन में कमाई - Page 361

346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

बारे में जानता हूं। इसे बम्बई औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1938 के अधीन चीफ कोन्सिलिएटर द्वारा अपने हाथ में लिया गया है। मुझे मध्यस्थता तंत्र के भंग होने तथा इस प्रश्न में इंगित अन्य विषयों की कोई जानकारी नहीं है। ये सब प्रांतीय सरकार के विषय हैं।

292

* श्रम विभाग के अधीन कतिपय कर्मचारियों में जाति-आधारित

प्रतिनिधित्व

55. सरदार संत सिंहः क्या माननीय सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) 1934 से प्रत्येक वेतनमान मेंः (i) स्थाई, और (ii) अस्थाई आधार पर उनके अधीन सभी विभागों और कार्यालयों में नियुक्त किए गए उन कर्मचारियों की कुल संख्या कितनी है जिनका वेतन 100/- रुपए प्रति माह और इससे अधिक है_

(ख) और इनमें से सिखों की संख्या_

(ग) ईसाइयों_

(घ) अधिवास वाले, यूरोपीय तथा आंग्ल भारतीयों, तथा

(घ) पारसियों की संख्या कितनी-कितनी है_ और इस प्रकार नियुक्त किए गए सिखों के पदनाम क्या-क्या हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जानकारी को इकट्ठा करने में जो समय और श्रम लगेगा, उसके अनुरूप फल प्राप्त नहीं होगा। अतः सरकार इस जानकारी को देने में अपनी असमर्थता, सखेद, प्रकट करती है।

293

@ दिल्ली में भू-सम्पदा लेन-देन में कमाई

57. श्री सत्य नारायण सिंहः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि दिल्ली में मकान सम्पत्ति के लेन-देन में लोग अच्छी कमाई कर रहे हैं_ और यदि हां, तो इसे रोकने के लिए सरकार ने क्या कार्रवाई की है?

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 5 मार्च, 1945, पृष्ठ 1039 @ वही।