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350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः चूंकि माननीय सदस्य ने उन असंबद्ध सदस्यों से इजाजत ले ली है जिनके समय में यह प्रस्ताव लाया जाएगा और सरकार के पास इस प्रस्ताव का उत्तर तैयार करने के लिए सोमवार या मंगलवार तक काफी समय है, मैं समझता हूं कि कार्यसूची में इस प्रस्ताव को अंकित किए जाने के लिए मेरी इजाजत है।

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* पंजीकृत व्यवसाय संघ

814. श्री मनु सूसबेदारः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि भारत में कितने पंजीकृत व्यवसाय संघ है और उनकी कुल सदस्य संख्या कितनी है_

(ख) राजकीय उद्यमों को छोड़कर औद्योगिक उद्यमों में कुल कितने व्यक्ति काम पर लगे हुए हैं_

(ग) किस आधार पर सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के व्यवसाय संघों को जैसे डाकतार, रेलवे, आदि को मान्यता दी है_

(घ) सरकार ने भारत सरकार के असैनिक विभागों में विशेषकर युद्ध से उत्पन्न महंगाई के संबंध में, वैध शिकायतों के संबंध में, अधीनस्थ सेवाओं के अभ्यावेदन के लिए किस चैनल की व्यवस्था की है_

(घ) भारत सरकार ने पिछले पांच सालों में भारत में मजदूर संघों को प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः क्या सहायता या अंशदान या अनुदान दिया है और किन परियोजनाओं के लिए दिया है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) 31 मार्च, 1942 को 747 पंजीकृत संघ थे और उनमें से 455 संघों की सदस्य संख्या (जिन्होंने विवरणियां पेश की थीं) 5,73,520 थी। मुझे खेद है कि इससे बाद की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

(ख) नवीनतम उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कारखाना अधिनियम, 1934 के अधीन निजी कारखानों में 1943 के दौरान नियोजित व्यक्तियों की औसत दैनिक संख्या लगभग 21 लाख थी और खान अधिनियम, 1923 के अधीन वाली खानों में लगभग साढ़े तीन लाख थी। 1942-43 के दौरान असम चाय बागानों में बही-खातों पर दर्ज कामगारों की औसत संख्या 6 लाख से कुछ ऊपर थी।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 8 मार्च, 1945, पृष्ठ 1171