299 युद्ध सप्लाईज कारखानों में मजदूरों के काम के घण्टे, मजदूरी आदि - Page 366

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 351

(ग) केन्द्रीय सरकार के औद्योगिक कर्मचारियों के संघों की मान्यता को विनियमित करने वाले नियमों की एक प्रति सदन के पटल पर रखी जाती है।

(घ) असैनिक विभागों में अधीनस्थ सेवाओं के सदस्य या तो मौखिक रूप से या लिखित रूप से विभागाध्यक्षों को या वैसी ही स्थिति वाले अधिकारियों को अपनी शिकायतें पेश कर सकते हैं अथवा मान्यता प्राप्त संघों, स्टाफ कौसिलों या वर्क्स समितियों, जहां वे हैं, के माध्यम से ऐसे प्राधिकारियों या सरकार के पास आवेदन कर सकते हैं। कोई भी व्यथित सरकारी कर्मचारी गृह विभाग की अधिसूचना संख्या 108938 दिनांक 24 अगस्त, 1938 में अंकित हिदायतों के अनुसार अपने विभागाध्यक्ष को या भारत सरकार को अभ्यावेदन कर सकता है। इस अधिसूचना की एक प्रति सभा पटल पर रखी जाती है।

(घ) उन रेल कर्मचारियों को रेल विभाग का अनुदान, जो संघ के पदाधिकारी हैं, आकस्मिक छुट्टी के बारे में कुछ सुविधाएं और संघ की बैठकों में भाग लेने के लिए रेल यात्रा के लिए निःशुल्क पास, अन्य कई प्रत्यक्ष सहायताएं भारत सरकार द्वारा मजदूर संघों को नहीं दी जाती हैं।

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* युद्ध सप्लाईज कारखानों में मजदूरों के

काम के घण्टे, मजदूरी आदि

@ 936. श्री अमरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्यायः (क) माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि युद्ध सामग्री का उत्पादन करने वाले कारखानों में और खानों में मजदूरों को लगातार कितने घण्टे काम करना पड़ता है और उनके श्रम के लिए उन्हें क्या मजदूरी दी जाती है_

(ख) क्या वही मजदूर उन्हीं कारखानों और खानों में पारियों में काम करते हैं_

(ग) कारखानों और खानों में मजदूरों के लिए अतिकालिक मजदूरी की दर क्या है_ और

(घ) कारखानों और खानों में मजदूरों को दिए जाने वाले राशन के लिए उनसे क्या लिया जाता है और मिलों, कारखानों और खानों में प्रत्येक मजदूर को कितना राशन दिया जाता है। क्या सरकार ने कारखानों, मिलों और खानों में मजदूरों को राशन के वितरण पर नजर रखने के लिए कोई अधिकारी नियुक्त किया है?

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 13 मार्च, 1945, पृष्ठ 1407 @ प्रश्नकर्ता के अनुपस्थित होने के कारण, प्रश्न का उत्तर सभा-पटल पर रखा गया।