299 युद्ध सप्लाईज कारखानों में मजदूरों के काम के घण्टे, मजदूरी आदि - Page 367

352 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) कारखानों में काम के घण्टे, फैक्टरीज एक्ट, 1934 (कारखाना अधिनियम, 1934) की धारा 34, 36-38 द्वारा विनियमित किए जाते हैं और खानों में काम के घण्टे इण्डियन माईन्स एक्ट, 1923 (भारतीय

खान अधिनियम, 1923) की धारा 22ख और 22ग द्वारा विनियमित किए जाते हैं। युद्ध सामग्री का उत्पादन करने वाले कारखानों की दशा में प्रांतीय सरकारें अनेक मामलों में सब या कुछ प्रावधानों से छूट प्रदान करती हैं। ये हिदायतें जारी की गई हैं कि अल्पकाल के सिवाय और आपात स्थिति के सिवाय काम के घण्टे प्रति सप्ताह 60 से अधिक नहीं होने चाहिए। मामूली तौर पर विश्राम की छूट संबंधी कानूनी अपेक्षाओं से कोई छूट नहीं दी जाती है। खेद है कि और अधिक निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है।

कारखानों और खानों के विभिन्न वर्गों में, किसी वर्ग विशेष में विभिन्न इकाईयों में, मजदूरी की दरों में काफी भिन्नता है। मुझे खेद है कि मजदूरी या मजदूरी के सामान्य औसत के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

(ख) प्रश्न समझ में नहीं आया।

(ग) फैक्टरीज एक्ट, 1934 की धारा 47 कारखानों में अतिकालिक मजदूरी की दरें विहित करती है। साधारणतः धारा के प्रावधानों से कोई छूट नहीं दी गई है। आपात स्थिति के सिवाय जिसमें खान की या उसमें काम करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा होता है, खानों में अतिकालिक काम करने की अनुमति नहीं है।

(घ) कारखानों और मिलों में मजदूरों को दिए जाने वाले राशन के लिए वसूल की जाने वाली कीमतों के बारे में एकरूपता नहीं है। लेकिन यह विदित है कि अनेक नियोजक खाद्यान्न आदि की आपूर्ति नियंत्रित दरों से भी कम दर पर करते हैं।

राशन वाले क्षेत्र में कामगारों को भी उतनी ही राशन की वस्तुएं मिलती हैं, जितनी आम जनता को। भारी कामगार अतिरिक्त राशन के लिए पात्र हैं। इसके साथ ही पका हुआ भोजन देने वाली औद्योगिक कैंटीनों को अब राशन के बाहर सामग्री मिलती है।

बिहार में कोयला खान कामगारों के लिए नियंत्रित दर पर बुनियादी मानदण्ड साम्ताहिक राशन कामगार और वयस्क आश्रित के लिए चार-चार सेर है तथा बालक के लिए दो सेर तथा एक चौथाई मूल राशन की दाल 6 सेर प्रति रुपए की रियायती दर पर दी जाती है। इसके अलावा आधा सेर चावल या अन्य खाद्यान्न खानों में प्रत्येक हाजिरी के लिए मुफत दिया जाता है। बंगाल के कुछ खदानों ने मामूली फेर-बदल के साथ वही मानदण्ड अपनाया है, जबकि दूसरे खदान घटाई गई दरों पर चार सेर प्रति सप्ताह प्रति कामगार की एक-सी दर पर देते हैं। मध्य प्रान्त और बरार के सभी