विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 353
खदानों में रियाययती दर पर राशन हर वयस्क कामगार को 6 सेर प्रति सप्ताह की दर से, प्रत्येक स्त्री आश्रित के लिए साढ़े तीन सेर और प्रत्येक बालक के लिए पौने दो सेर की दर से दिया जाता है। कामगारों को राशन की देख-देख के लिए सामान्य फूड राशनिंग संगठनों के अलावा सरकार का कोई विशेष अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है। फिर भी कोयला खानों के संबंध में 6 राशन निरीक्षक नियुक्त किए गए है, बिहार सरकार के अधीन बिहार के लिए और तीन खान विभाग से संबद्ध बंगाल के लिए।
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* मजदूरों की न्यूनतम अनिवार्य मजदूरी नियत करना
@ 937. श्री अमरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्यायः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य ने आवश्यक मजदूरी वर्गों के लिए अपेक्षित आवश्यक वस्तुएं और कपड़ों की कीमतों के अनुसार कारखानों, मिलों और खानों में मजदूरों की न्यूनतम अनिवार्य मजदूरी नियत की है_
(ख) क्या काराखानों, मिलों और खानों में मजदूरों के बालकों की शिक्षा के लिए कोई इंतजाम किया गया है_ क्या प्रौढ़ मजदूरों के लिए शिक्षा की कोई व्यवस्था है_
(ग) क्या कारखानों मिलों और खानों में वेतन सहित छुट्टि की कोई व्यवस्था है_ और इलाज के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) मिलों सहित कारखानों में या खानों में कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी नियत करने के लिए कोई कानून नहीं है।
(ख) कामगारों के बालकों के लिए अथवा प्रौढ़ कामगारों के लिए कारखानों या
खानों से बाहर शिक्षा संबंधी सुविधाएं प्रांतीय प्राधिकारियों द्वारा प्रदान की जाती हैं।
कुछ उपक्रमों के स्वामियों ने दोनों परियोजना के लिए स्वयं व्यवस्था की है लेकिन इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी मेरे पास उपलब्ध नहीं है। निःसंदेह माननीय सदस्य को यह मालूम है कि औद्योगिक उपक्रमों के मालिकों की इस बाबत कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।
(ग) ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके अनुसार वेतन सहित छुट्टियां दी जाएं। जहां तक गैर-मौसमी कारखानों का संबंध है, इस सदन के समक्ष इस विषय पर एक विधेयक है जो उसने प्रवर समिति के पास भेज दिया है।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 13 मार्च, 1945, पृष्ठ 1407 @ प्रश्नकर्ता अनुपस्थिति होने के कारण, प्रश्न का उत्तर सभा-पटल पर रखा गया।